कटारा मर्डर केस: सुप्रीम कोर्ट का विकास और विशाल यादव को फासी की सज़ा से इनकार

दिल्ली|नीतीश की मां नीलम कटारा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका देकर अपील की थी कि दोषियों को फांसी हो, लेकिन उनकी इस याचिका को सुप्रीम कोर्ट  ने ख़ारिज कर दिया|न्यायमूर्ति जेएस खेहर और आर भानुमति की बेंच ने कहा कि यह एक हत्याकांड था क्योंकि एक युवक की हत्या की गई थी लेकिन यह नृशंस हत्याकांड या दुर्लभतम में दुर्लभ जैसे श्रेणी का नहीं था, जिसमें उनको मृत्युदंड या आजीवन कारावास की सजा हो।

कोर्ट ने कहा कि इसे सम्मान के लिए हत्या करार नहीं दिया जा सकता है क्योंकि यादव परिवार को नीतीश और भारती की दोस्ती पर कोई आपत्ति नहीं थी। हालांकि हथौड़े के एक ही प्रहार से हत्या की गई। नृशंस तरीके से उसकी हत्या नहीं की गई, जिसके लिए हत्यारों को मौत की सजा दी जाए। सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही नीतीश हत्याकांड में विकास और विशाल को दोषी माना है। हालांकि दोनों की सजा पर अभी बहस होना बाकी है। दिल्‍ली हाईकोर्ट ने दोनों को 30 साल जेल की सजा सुनाई है।

ज्ञात हो कि 25 साल के नीतीश कटारा को दिल्ली के करीब गाजियाबाद में जलाकर मार दिया गया। उसके रिश्ते बाहुबली नेता डीपी यादव की बेटी भारत यादव से थे। भारती और नीतीश एक प्रोग्राम में गए, जहां से नीतीश का अपहरण हो गया। कोर्ट में साबित हुआ कि नीतीश को अगवा करके जलाने वाले भारती के भाई विकास और चचेरे भाई विशाल थे। लाश इतनी बुरी तरह जल गई थी कि उसकी पहचान ही नहीं हो पाई। बाद में डीएनए जांच में पता चला कि लाश नीतीश कटारा की ही थी।

 

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