राज्यपाल रहते हुए क्या कोई कुछ भी कर सकता है: सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्‍ली। सुप्रीम कोर्ट ने व्यापमं घोटाले में आज केन्द्र और मध्य प्रदेश के राज्यपाल से जवाब तलब किया है। उसने यह निर्देश कथित रूप से संलिप्तता के आधार पर मध्य प्रदेश के राज्यपाल राम नरेश यादव को पद से हटाने के लिये दायर याचिका के चलते दिए है। गौरतलब हो, वर्तमान केन्द्रीय जांच ब्यूरो व्यापमं घोटाले की जांच कर रहा है।

याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से सवाल किया कि, क्या राज्यपाल रहते हुए कोई कुछ भी कर सकता है ? क्या उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती है ?

उल्लेखनीय है कि, एसआईटी ने वन रक्षक भर्ती घोटाले में राज्यपाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। हालांकि राज्यपाल ने एफआईआर को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। इसके बाद एफआईआर को खारिज कर दिया गया था।

प्रधान न्यायाधीश एचएल दत्तू, न्यायमूर्ति शिव कीर्ति सिंह और न्यायमूर्ति अमिताव राय की पीठ ने सामाजिक कार्यकर्ता संजय शुक्ला की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल का यह अनुरोध स्वीकार कर लिया कि राज्यपाल को नोटिस जारी किया जाना चाहिए। याचिका में शीर्ष अदालत से अनुरोध किया गया है कि यदि कोई राज्यपाल भ्रष्ट आचरण के आरोप में संलिप्त पाया जाता है तो उसे पद से हटाने के लिये दिशानिर्देश बनाने का निर्देश गृह मंत्रालय को दिया जाए।

इससे पहले, शीर्ष अदालत इस मामले में यादव की कथित संलिप्तता के आधार पर उन्हें पद से हटाने के लिए दायर एक अन्य याचिका पर सुनवाई के लिये तैयार हो गई थी। पहली याचिका वकीलों के एक समूह ने दायर की थी जिसमे यादव को पद से हटाने और इस मामले में उनका बयान दर्ज करने का अनुरोध किया गया था। गौरतलब है कि मध्य प्रदेश में करोड़ों रुपए के व्यापमं घोटाले में अनेक पेशेवर व्यक्ति, राजनीतिक व्यक्ति और नौकरशाह अभियुक्त हैं। मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा बोर्ड, जिसे व्यापमं के नाम से जाना जाता है, प्रदेश में शिक्षकों, चिकित्सा अधिकारियों, सिपाहियों और वन रक्षकों आदि के विभिन्न पदों के लिये परीक्षा अयोजित करता है।

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