दिल्ली सरकार को हाईकोर्ट का झटका, नहीं करा सकते ऑडिट

नई दिल्ली। हाईकोर्ट ने दिल्ली में बिजली कंपनियों के CAG से ऑडिट कराने के केजरीवाल सरकार के आदेश को रद्द कर दिया है। इस आदेश ने सीएम केजरीवाल कोबड़ा झटका दिया है।  केजरीवाल ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का एलान किया है लेकिन सवाल ये है कि क्या सस्ती बिजली का सपना टूट गया है?

दिल्ली में बिजली सस्ती करने के अरविंद केजरीवाल के वादे को बड़ा झटका लगा है। दिल्ली हाईकोर्ट ने प्राइवेट बिजली कंपनियों के CAG से ऑडिट के आदेश को रद्द कर दिया है। हाईकोर्ट ने इसके पीछे दलील दी है कि प्राइवेट कंपनियों की CAG से ऑडिट के लिए जो प्रक्रिया अपनाई गई थी, वो सही नहीं थी।

दिल्ली में पहली बार 49 दिनों की सरकार बनने पर अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली में बिजली कंपनियों के ऑडिट का आदेश दिया था।

आखिर क्यों ऑडिट चाहते थे केजरीवाल: तब  केजरीवाल ने दलील दी थी कि ऑडिट के बाद बिजली कंपनियों की चोरी पकड़ी जाएगी, जिसके बाद दिल्ली में बिजली की दरों में कटौती हो सकेगी।बिजली कंपनियों ने दिल्ली हाईकोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी थी।

ऑडिट नहीं चाहती हैं कंपनियां: ऑडिट नहीं करवाने के पीछे कंपनियों ने दलीली दी थी कि निजी कंपनी होने की वजह से CAG ऑडिट नहीं कर सकती। कंपनियों ने ये भी दलील दी थी सरकार ने इसके लिए वक्त नहीं दिया गया था।

जिस ऊर्जा एनजीओ ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, उसने उल्टा अरविंद केजरीवाल पर जान बूझकर सही प्रक्रिया नहीं अपनाने का आरोप लगाया है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का एलान किया है। हाईकोर्ट का आदेश दिल्ली वालों के लिए अस्थायी झटका है। मैं दिल्ली के लोगों को सस्ती बिजली देने के लिए प्रतिबद्ध हूं। हमारा संघर्ष जारी रहेगा।

कांग्रेस ने भी दिल्ली सरकार से फैसले को चुनौती देने को कहा है। दिल्ली में अनिल अंबानी की कंपनी और टाटा समूह समेत तीन बिजली कंपनियां बिजली सप्लाई करती हैं। अरविंद केजरीवाल ने बिजली कंपनियों के घोटाले को विधानसभा चुनाव के दौरान भी मुद्दा बनाया था।

 

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