मुस्लिमों की बढ़ती आबादी से चिंतित आरएसएस

नयी दिल्ली। मुस्लिम आबादी 17 करोड़ से अधिक होने के मद्देनजर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की शुक्रवार से शुरू हो रही तीन दिवसीय बैठक में इस विषय पर ध्यान देने के लिए एक प्रस्ताव पारित किया जा सकता है।

संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य ने बैठक की पूर्वसंध्या पर मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि हाल ही में आए जनगणना के आंकड़े जनसंख्या वृद्धि में अंसतुलन दिखाते हैं।

उन्होंने कहा, ‘बैठक में इस विषय पर गहन विचार-विमर्श किया जाएगा और इस संबंध में एक प्रस्ताव पारित किया जा सकता है।’ बैठक में संघ प्रमुख मोहन भागवत समेत संगठन के समस्त शीर्ष पदाधिकारी भाग लेंगे।

आंकड़े: पिछले दिनों जारी जनगणना के आंकड़ों के अनुसार मुस्लिम समुदाय की आबादी 2001 से 2011 के बीच 10 साल में 0.8 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 17.22 करोड़ पहुंच गई, वहीं हिंदुओं की जनसंख्या इस अवधि में 0.7 प्रतिशत कमी के साथ 96.63 करोड़ रह गई।

पिछले हफ्ते विजयादशमी पर अपने संबोधन में भागवत ने कहा था कि पिछली दो जनगणना रिपोर्टों के तथ्य और आंकड़ों में दिखे असंतुलन पर व्यापक मंथन हो रहा है।

वैद्य ने उपमन्यु हजारिका आयोग की इस रिपोर्ट पर भी देशव्यापी बहस की जरूरत बताई कि बांग्लादेश से अवैध पलायन के चलते 2047 तक असम में स्थानीय आबादी के सिमटकर अल्पसंख्यक हो जाने का खतरा है।

रिपोर्ट पर चर्चा की अपील: आरएसएस ने उपमन्यु हजारिका आयोग की उस रिपोर्ट पर देशव्यापी चर्चा का आह्वान किया जिसमें कहा गया है कि बांग्लादेश से होने वाली घुसपैठ से असम की मूल जनसंख्या के 2047 तक अल्पसंख्यक बन जाने का खतरा पैदा हो गया है।

संघ अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्य ने कहा, ‘हाल में हजारिका आयोग की रिपोर्ट ने असम और बंगाल में जनसांख्यिकीय स्थिति में परिवर्तन के बारे में एक चौंकाने वाली जानकारी दी है।

यदि यही प्रवृत्ति जारी रही तो भारतीयों की जनसंख्या कम हो जाएगी और विदेशी बढ़ जाएंगे.’ उन्होंने कहा कि इस संबंध में देशव्यापी चर्चा होनी चाहिए।

भागवत भी पहुंचे रांची: वैद्य ने कहा कि शुक्रवार से यहां शुरू हो रहे अपने तीन दिवसीय अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल बैठक में ‘जनसंख्या वृद्धि में असंतुलन’ पर व्यापक शोध करेगा और एक प्रस्ताव भी पारित किया जा सकता है। संघ के प्रमुख भागवत बैठक में हिस्सा लेने के लिए रांची में हैं।

भारत-बांग्लादेश सीमा को लेकर सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित एक सदस्यीय हजारिका आयोग ने इस सिफारिश के साथ अपनी रिपोर्ट सौंपी थी कि सुप्रीम कोर्ट बांग्लादेश से होने वाली घुसपैठ को लेकर चिंता के मुद्दों की एक उच्चस्तरीय जांच का आदेश दे।

असम की मूल जनसंख्या के 2047 तक अल्पसंख्यक बन जाने का खतरा उत्पन्न हो गया है। कोर्ट ने केंद्र और असम सरकारों को पांच नवम्बर को होने वाली अगली सुनवाई पर इस सिफारिश पर जवाब देने का निर्देश दिया है।

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