मोदी सरकार और संघ यह नहीं तय कर सकते कि हम क्या खाएं और क्या करें : भार्गव

कोलकाता| देश में बढ़ती असहिष्णुता के खिलाफ पिछले दिनों कई लेखकों व साहित्यकारों द्वारा अपने अकादमी पुरस्कार लौटाए जाने के बाद गुरुवार को नामी भारतीय वैज्ञानिक पुष्प मित्र भार्गव ने भी अपना पद्म भूषण पुरस्कार लौटाने की बात कही। 87 वर्षीय भार्गव सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉल्यिक्यूलर बायोलॉजी सीसीएमबी के संस्थापक-निदेशक हैं। उन्होंने कहा है कि धार्मिक मान्यता व्यक्तिगत पसंद है और इसे राजनीति में नहीं पड़ना चाहिए। साथ ही भार्गव ने कहा कि देश की सरकार जिस तरह से काम कर रही है, उससे भारत पाकिस्तान बनने की तरफ बढ़ रहा है।

उन्होंने बताया, “आज हम लोकतंत्र में एक खौफ को देख रहे हैं.. हिंदुत्व का प्रसार.. मेरा मानना है कि धर्म एक व्यक्तिगत मामला है। इसे व्यक्तिगत ही बने रहना चाहिए। इसे राजनीति में नहीं पड़ना चाहिए, जैसा कि इन दिनों हो रहा है।” उन्होंने कहा कि देश में इस वक्त जो हालत है, वह मेरी आजादी में बाधा है| सरकार और संघ यह तय करने का प्रयास कर रहे हैं कि हम क्या  खाएं और क्या करें| हम धार्मिक कट्टरता से अपने लोकतंत्र को ख़त्म नहीं कर सकते |

भार्गव ने कहा कि वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान को ‘निंदनीय’ मानते हैं, जिसमें उन्होंने कहा था कि महिलाओं को स्वयं को सिर्फ घरेलू कामकाज तक सीमित रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह गृह सचिव से मुलाकात करेंगे और अपना पद्मभूषण लौटाएंगे। उन्होंने वैज्ञानिक समुदाय से ताल्लुक रखने वाले युवाओं को भी विरोध-प्रदर्शन के लिए आगे आने को प्रेरित किया।

उल्लेखनीय है कि मंगलवार को करीब 100 वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने बढ़ती असहिष्णुता के खिलाफ राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को संबोधित एक ऑनलाइन याचिका शुरू की, इस याचिका पर भार्गव के भी हस्ताक्षर हैं।

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