23/05/2018 02:08 am
भारत को न्याय सिखलाता पाकिस्तान-आतंक का दाग छुड़ाने के जुगाड़ में पाकिस्तान-यूपी में निवेश से मिले 35 लाख से ज्यादा रोजगार, अब इन क्षेत्रों से है इंवेस्टमेंट-नौकरी की उम्मीद-यूपी इन्वेस्टर्स समिट: मुकेश अंबानी की घोषणा, तीन साल में यूपी में 10,000 करोड़ का करेंगे निवेश-ऐसी मुसीबत में मिलेगा इस स्कीम का बड़ा फायदा, बस Aadhaar लिंक कराकर टेंशन फ्री हो जाओ-जींदः अमित शाह ने की बुलेट की सवारी, 'मिशन 2019' का आगाज-बर्थडे स्पेशल: आज है प्रीति जिंटा का बर्थडे, जानिए उनके बारे में कुछ ख़ास बाते...-पहले यूनियन अड्रेस में डॉनल्ड ट्रंप ने दोहराया 'अमेरिका फर्स्ट'-चीड़ के पेड़ से तैयार होगी मोदी की खास जैकेट, नाम दिया गया 'नमोवस्त्र'-डीपीएस स्कूल बस के भीषण हादसे में आखिर इंदौर के आरटीओ पर गिर गिरी गाज-फतवे को लेकर छिड़ी बहस - झींगा, केंकड़ा खाना बताया हराम-12 फुट ऊंची टहनियों पर लटकी मिली दो सगी बहनों की लाश, इस असमंजस से घिरी पुलिस-केंद्रीय मंत्री के संविधान बदलने वाले बयान पर हंगामा, लोकसभा 2 बजे तक स्थगित-AIMIM नेता का ऐलान- केंद्रीय मंत्री हेगड़े की जुबान काटने वाले को 1 करोड़ का इनाम-भारत की आपत्ति पर बोला पाक- जाधव की पत्नी की जूतियों में था संदिग्ध सामान, जांच जारी-थोक महंगाई बढ़ी, खाने पीने की चीजों की कीमतों में इजाफा-क्राइम ब्रांच ने किया कैशक्वाइन गैंग का पर्दाफाश-उत्तर प्रदेश - डायल 100 में तैनात मुख्य आरक्षी ने फांसी लगाकर की आत्महत्या-अमेरिकी रिपब्लिकन सांसद ने की आत्महत्या-नोटबंदी के बाद कांग्रेस के पूर्व विधायक ने आठ करोड़ रुपये ठिकाने लगाये थे-बैंकों में जमा लोगों का पैसा बिल्कुल सुरक्षित है-नरेन्द्र मोदी-मकोका की तर्ज पर बनेगा यूपीकोका कानून -यूपी सरकार-इस बार मोदी और अमित शाह की गुजरात में दाल गलने वाली नही -शिवानन्द तिवारी-भाजपा गुजरात से डरती है- राहुल गाँधी-धार्मिक आधारों पर देश को बाटना घातक- फारूक अब्दुल्ला-20 फीसदी छात्रों को ही रोजगार मिल पा रहे हैं- इंडस्ट्री एसोसिएशन-गुजरात चुनाव में पीएम मोदी राष्ट्रीय नेता कम, क्षेत्रीय नेता ज्यादा बन गए है- शिवसेना-मुजफ्फरनगर द बर्निंग लव नही किया गया है बैन -उत्तर प्रदेश सरकार-राहुल गांधी कांग्रेस के निर्विरोध प्रेसिडेंट चुने गए-गुजरात विधानसभा चुनाव -बीजेपी ने जारी किया विजन डॉक्यूमेंट-गुजरात विधानसभा चुनाव के पहले बीजेपी सांसद ने दिया इस्तीफा-क्या मणिशंकर अय्यर पाकिस्तान मेरी सुपारी देने गये थे - नरेंद्र मोदी-बीजेपी पांचवीं बार गुजरात में बना सकती है सरकार-गुजरात चुनाव - पहले चरण के प्रचार का आखिरी दिन आज-जेल में बंद पूर्व सांसद के पास से छापेमारी में नगदी और मोबाइल बरामद-आधार कार्ड लिंक करने को लेकर सोशल मिडिया वायरल वीडियो का सच-फराह खान ने लालकृष्ण आडवाणी को बनाया निशाना-ऑड -ईवन किसी को कोई छूट नहीं मिलेगी-गुजरात चुनाव में भी राम मंदिर की एंट्री-यशवंत सिन्हा के समर्थन में आयी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अरविंद केजरीवाल-शरद यादव और अली अनवर की राज्यसभा सदस्यता खत्म- जद(यू) ने कसा तंज-गुजरात में चुनाव प्रचार करेंगे भाजपा के मेयर-राम जन्मभूमि मामले की सुनवाई साल 2019 के बाद हो - कपिल सिब्बल-मध्यप्रदेश -बलात्कारियों को फांसी की सजा का विधेयक पास-अफगानिस्तान मामले में महत्वपूर्ण पक्ष है भारत-अमेरिका-संकल्प पत्र के सभी वादे पूरा करे -योगी आदित्यनाथ-गुजरात और हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनाव के नतीजो के बाद हो सकती है राहुल गाँधी की ताजपोशी-यूपी - आरएसएस कार्यकर्ता की हत्या-ताजमहल के पास मल्टीलेवल पार्किंग के लिए नही मिली योगी सरकार को S.C. से राहत-ग्वालियर में नाथूराम गोडसे का मंदिर बनाये जाने पर बीजेपी का बड़ा बयान

सावधान: हिमालय का गर्भ इस वजह से बढ़ा रहा है बड़े भूकंप का खतरा

देहरादून : बीते 50 सालों में हिमालय (उत्तर-पश्चिम) में जितनी भूकंपीय ऊर्जा भूगर्भ में एकत्रित हुई है, उसका महज तीन से पांच फीसद तक हिस्सा ही बाहर निकल पाया है। वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के ताजा अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ। वैज्ञानिक निष्कर्ष निकाल रहे हैं कि यह इतनी ऊर्जा है कि इससे कभी भी आठ रिक्टर स्केल से अधिक क्षमता का भूकंप आ सकता है।  

लंबे समय से यह बात सामने आ रही थी कि हिमालय (उत्तर-पश्चिम) में कांगड़ा में वर्ष 1905 में 7.8 रिक्टर स्केल के भूकंप के बाद कोई बड़ा भूकंप नहीं आया है। इससे माना जा रहा था कि धरती में भूकंपीय ऊर्जा एकत्रित हो रही है। हालांकि अब तक ऐसा कोई अध्ययन नहीं किया गया था, जिससे साफ तौर पर कुछ कहा जा सके। 

वाडिया संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सुशील कुमार के मुताबिक एकत्रित ऊर्जा व बाहर निकल रही ऊर्जा का आकलन करने के लिए वर्ष 1968 से अब तक आए भूकंपों और इंडियन प्लेट के भूगर्भ में 14 मिलीमीटर प्रतिवर्ष की रफ्तार से सिकुड़ने या मूवमेंट से जमा हो रही ऊर्जा का अध्ययन किया गया। 

अध्ययन में इस अवधि में आए 1.8 से 5.6 रिक्टर स्केल के 423 छोटे भूकंपों को शामिल किया गया। इसके अलावा मध्यम स्तर के किन्नौर में वर्ष 1975 में आए 6.8 रिक्टर स्केल, उत्तरकाशी में वर्ष 1991 में आए 6.4 रिक्टर व चमोली में वर्ष 1999 में आए 6.6 रिक्टर स्केल के मध्यम भूकंप में बाहर निकली ऊर्जा को भी इसका हिस्सा बनाया गया। 

पता चला कि इन सभी भूकंपों के बाद भी सिर्फ तीन से पांच फीसद ऊर्जा ही बाहर निकल पाई है। यानी कि अभी भी कम से कम 95 फीसद भूकंपीय ऊर्जा भूगर्भ में ही जमा है। यह ऊर्जा भविष्य में कब बाहर निकलेगी, इसका पता नहीं लगाया जा सकता। सिर्फ आने वाले बड़े भूकंप से निपटने को समुचित तैयारी की जा सकती है। 

20 हजार किलोमीटर इलाके में अध्ययन वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. सुशील कुमार के मुताबिक उत्तराखंड, हिमालय से लेकर जम्मू और कश्मीर तक फैले उत्तर-पश्चिम हिमालय के 20 हजार किलोमीटर क्षेत्रफल में यह अध्ययन किया गया। 

धरती के रैंप में अधिक ऊर्जा अध्ययन में धरती के भीतर उन रैंप (स्टेप) का अध्ययन भी किया गया, जहां गैप होने के चलते अधिक ऊर्जा जमा होती है। इसमें उच्च हिमालय में 12 से 22 किलोमीटर नीचे के रैंप व टेथिस हिमालय में 28 से 40 किलोमीटर नीचे बने रैंप में जमा ऊर्जा का भी आकलन किया गया।