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जिले के चार प्रमुख हस्तियों को राष्‍ट्रपति भवन में आज पद्म सम्मान दिया जा रहा है

जिले के चार प्रमुख हस्तियों को राष्‍ट्रपति भवन में आज पद्म सम्मान दिया जा रहा है। इनमें शास्त्रीय संगीतज्ञ डा. राजेश्वर आचार्य, बिरहा गायक हीरालाल यादव, बास्केटबॉल खिलाड़ी प्रशांति सिंह और जीआई विशेषज्ञ डा. रजनीकांत शामिल हैं।

वैसे काशी पद्म अवार्डियों की ही नगरी कही जाती है लेकिन यह पहला मौका है जब एक साथ चार लोगों को पद्मश्री से सम्मानित किया जा रहा है। 

लोक गायकी का बडा नाम हीरालाल : लोक गायन की बिरहा विधा के सम्राट माने जाने वाले हीरालाल यादव का नाम इस बिसरती कला को आसमान देने के लिए लिया जाता है। मूलरूप से हरहुआ ब्लाक के बेलवरिया निवासी हीरालाल यादव का जन्म वर्ष 1936 में चेतगंज स्थित सरायगोवर्धन में हुआ। बचपन गरीबी में गुजरा, भैंस चराने के दौरान शौकिया गाते-गाते अपनी सशक्त गायकी से बिरहा को राष्ट्रीय फलक पर पहचान दिलाई और बिरहा सम्राट के रूप में ख्यात हुए। यह कठोर स्वर साधना का प्रतिफल तो रहा ही गुरु रम्मन दास, होरी व गाटर खलीफा जैसे गुरुओं का आशीर्वाद रहा। उन्होंने वर्ष 1962 से आकाशवाणी व दूरदर्शन पर बिरहा के शौकीनों को दीवाना बनाया। भक्ति रस में पगे लोकगीत और कजरी पर खूब झुमाया। 

बाबा को समर्पित डा. राजेश्वर आचार्य : बीएचयू में हिंदी विभागाध्यक्ष रहे पं. पद्मनारायण आचार्य के पुत्र राजेश्वर आचार्य खुद भी गोरखपुर विश्वविद्यालय में फाइन आर्ट एंड म्यूजिक के हेड रह चुके हैं। डा. आचार्य ने महान संगीतज्ञ बलवंत राय भïट्ट व पं. ओंकारनाथ ठाकुर के सानिध्य में संगीत साधना की। ध्रुपद गायकी के साथ ही जलतरंग वादन में भी उनका कोई सानी नहीं है। उन्होंने 1972 में लगातार साढ़े बारह घंटे जलतरंग वादन कर तो इसके ठीक एक साल के अंतराल पर 13 घंटे लगातार गायन का दोहरा विश्व रिकार्ड बनाया। अखिल भारतीय ध्रुपद मेला, संगीत संस्कृति संगम, नाट्यानुशीलन, इंटरनेशनल आर्टन, सार्वभौम ध्रुपद विद्यापीठ, अभिवादन समेत देश भर में कई सांगीतिक संस्थाओं की इन्होंने स्थापना भी की। बैजू बावरा व पं. ओंकारनाथ ठाकुर अवार्ड समेत 26 सम्मानों से उन्हें नवाजा जा चुका है। 

जीआई विशेषज्ञ डा. रजनीकांत :  हस्तकला और हस्तशिल्प के गढ़ बनारस व पूर्वांचल के कलाओं को वैश्विक पहचान दिलाने के साथ ही बुनकरों-शिल्पियों के विकास की पटकथा लिखने वाले डा. रजनीकांत को पद्मश्री दिया जा रहा है। डा. रजनीकांत इसका श्रेय समस्त जनपदवासियों को देते हैं। कहते हैं कि अब तक नौ जीआइ उत्पादों का पंजीयन करा चुका हूं और सात की जीआइ प्रक्रिया में शामिल होकर बनारस और पूर्वांचल की कलाओं को संरक्षित कराया है। इससे पहले मुझे वर्ष 2017 में देश के बौद्धिक संपदा पुरस्कार से भी नवाजा जा चुका है। कहा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दीन दयाल हस्तकला संकुल के रूप में यहां के कलाकारों को वैश्विक मंच प्रदान किया है। जीआइ पंजीयन के बाद इन उत्पादों की प्रमाणिकता व गुणवत्ता दोनों पुख्ता होती हैं, जो वैश्विक बाजार की बड़ी मांग भी है। डा. रजनीकांत मूलरूप से मीरजापुर के रहने वाले हैं। बीएचयू से पीएचडी करने के बाद पिछले 25 वर्षों से समाज सेवा के कार्य में बुनकरों, शिल्पियों, भूमिहीन महिलाओं व बच्चों के विकास के साथ ही शिक्षा के क्षेत्र में भी योगदान दे रहे हैं। 

प्रशांति बास्केटबाल की दुनिया का बड़ा नाम : सिंह सिस्टर्स के नाम से बास्केटबॉल की दुनिया में मशहूर चारों सगी बहनेंं (दिव्या सिंह, प्रशांति सिंह, आकांक्षा सिंह व प्रतिमा सिंह चारों अंतरराष्ट्रीय बास्केटबाल खिलाड़ी)। इन बहनों को बास्केटबॉल की दुनिया मेंं लाने वाली प्रियंका सिंह इन दिनों दक्षिण कोरिया मेंं बास्केटबॉल कोच है। पिता गौरीशंकर सिंह और मां उर्मिला सिंह ने शुरू में कुछ टोका-टाकी कि लेकिन इन बहनों की लगन देकर उनको हर कदम पर प्रोत्साहित किया। भाई विक्रांत सिंह फुटबॉल का जाना-माना खिलाड़ी है।  

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