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भगवान कृष्ण पर मोहित हो गईं थीं माँ सरस्वती, मिला था यह वरदान

बसंत पंचमी बहुत ही खुशनुमा दिन माना जाता है. ऐसे में यह त्यौहार इस साल 10 फरवरी को आने वाला है यानी मनाया जाने वाला है. इस दिन सभी देवी सरस्वती की पूजा करते हैं. आप सभी को बता दें कि माता सरस्वती की पूजा सबसे पहले भगवान श्री कृष्ण ने की थी. जी हाँ, विद्या की अभिलाषा रखने वाले व्यक्ति के लिए ये दिन बहुत महत्वपूर्ण होता है और सबसे पहले मां सरस्वती की पूजा के बाद ही विद्यारंभ करते हैं. कहते हैं ऐसा करने पर माँ प्रसन्न होती है और बुद्घि तथा विवेकशील बनने का आशीर्वाद दे देती हैं और विद्यार्थी के लिए माँ सरस्वती का स्थान सबसे पहले माना जाता है. आप सभी को बता दें कि इस दिन देवी सरस्वती की पूजा करने के पीछे भी पौराणिक कथा है जो बहुत कम लोग जानते हैं.

आपको बता दें कि सबसे पहले माँ की पूजा श्रीकृष्ण और ब्रह्माजी ने ही की है और देवी सरस्वती ने जब श्रीकृष्ण को देखा तो उनके रूप पर मोहित हो गईं और पति के रूप में पाने की इच्छा करने लगीं थी. जी हाँ, वहीं भगवान कृष्ण को इस बात का पता चलने पर उन्होंने कहा कि वे तो राधा के प्रति समर्पित हैं लेकिन सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए उन्होंने वरदान दिया कि प्रत्येक विद्या की इच्छा रखनेवाला माघ मास की शुक्ल पंचमी को आपका पूजन करेगा. आइए बताते हैं आपको इससे जुडी कथा.

आप सभी को पहले तो यह बता दें कि यह कथा पौरा‍णिक संदर्भों से ली गई है. कथानुसार सृष्टि के सृजनकर्ता ब्रह्माजी ने जब धरती को मूक और नीरस देखा तो अपने कमंडल से जल लेकर छिटका दिया. इससे सारी धरा हरियाली से आच्छादित हो गई पर साथ ही देवी सरस्वती का उद्भव हुआ जिसे ब्रह्माजी ने आदेश दिया कि वीणा व पुस्तक से इस सृष्टि को आलोकित करें. देवी सरस्वती के वीणा से झंकृत संगीत में प्रकृति विहंगम नृत्य करने लगती है. देवी के ज्ञान का प्रकाश पूरी धरा को प्रकाशमान करता है. जिस तरह सारे देवों और ईश्वरों में जो स्थान श्रीकृष्ण का है वही स्थान ऋतुओं में वसंत का है. यह स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने स्वीकार किया है.

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