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बाल संप्रेक्षण गृह में आलू की बोरी में मरा मिला चूहा

खुल्दाबाद स्थित बाल संप्रेक्षण गृह की स्थिति बहुत ही बदतर है। आलू की बोरी में चूहा मरा मिला। बच्चों को ठीक से न पोषण मिलता है और न धूप मिल पाती है। उनके खेलने-कूदने और पढ़ाई के लिए भी कोई इंतजाम नहीं हैं। बच्चों से काम कराया जाता है। यहां तक कि उनसे नालियां भी साफ कराई जाती हैं। यह सब कुछ सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं की निगरानी न होने की वजह से है। यह जानकारी सर्किट हाउस में राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के अध्यक्ष डॉ. विशेष गुप्ता ने दी।

अध्यक्ष ने बताया कि तीन सदस्यीय टीम सूबे के विभिन्न मंडलों में दौरा कर बाल अधिकारों की हकीकत परख रही है। इसी क्रम में टीम यहां आई है। दो सदस्यों डॉ.नीता साहू और डॉ. सुचिता चतुर्वेदी समेत उन्होंने खुल्दाबाद में बाल संप्रेक्षण गृह का निरीक्षण किया। भंडार गृह की जांच की गई तो सब्जी बिखरी, फ्रिज खाली और आलू की बोरी में चूहा मरा मिला। भोजन की गुणवत्ता भी बहुत खराब मिली। खानपान की व्यवस्था के लिए कौन सी एजेंसी लगी है, कितना बजट आता है, इसका ब्योरा मांगा गया है।

बच्चों के हेल्थ कार्ड भी नहीं बने हैं। उनके इलाज के लिए डॉक्टर कब आते हैं, पूछने पर इसकी भी सही जानकारी अफसर नहीं दे सके। वहां बेड सीट भी नहीं है। बताया कि छह के सापेक्ष पांच केयरटेकर होने के बावजूद बच्चों से काम कराना समझ से परे है। बच्चों की नियमित सुनवाई नहीं हो रही है। पूछने पर अधिकारियों ने पुलिस फोर्स की अनुपलब्धता बताई। केयरटेयर बच्चों की पिटाई करते हैं। कई बच्चों को चोट लगी थी। कहा कि जितने परेशान हो सकते हैं, बच्चे उतने परेशान हैं। जिम्मेदार एजेंसियों की निगरानी न होने का ही नजीता देवरिया और मुजफ्फरनगर की घटनाएं हैं। बच्चों के सुधार के लिए प्रयास नहीं :

अध्यक्ष ने कहा कि बच्चों के सुधार के लिए अफसरों की ओर से कोई प्रयास नहीं हुए। इसके लिए न किसी मनोवैज्ञानिक और न ही समाज के अन्य लोगों से संपर्क किया गया। पढ़ाई के लिए भी कोई इंतजाम नहीं :

बच्चों की पढ़ाई के लिए भी कोई इंतजाम नहीं है। वह पढ़ने के लिए तड़प रहे हैं। ऐसे बच्चों की पढ़ाई की जिम्मेदारी बीएसए की है। लेकिन कोई टीचर नहीं जाते हैं। मिड-डे-मिल की गुणवत्ता की भी जांच की जाएगी। बच्चों को कौशल विकास योजना से जोड़ा जाना चाहिए :

अध्यक्ष ने वाराणसी में बाल संप्रेक्षण गृह का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां विधिक सेवा प्राधिकरण की मदद ली जाती है। प्रधानमंत्री के लिए किशोरियों ने केक तैयार किया था। उन्होंने यहां भी बच्चों को कौशल विकास योजना से जोड़ने की सलाह दी। कहा कि इनसे भी परिवार के बच्चों की तरह पेश आने की जरूरत है। तभी उनमें सुधार आएगा। कहा कि पूरी रिपोर्ट मुख्य सचिव और मंत्रालय को भेजी जाएगी। जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ भी रिपोर्ट दी जाएगी।

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