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बागपत में दुष्कर्म पीड़िता के परिवार ने दहशत में छोड़ा गांव, दी जान से मारने की धमकी

जिला अस्पताल में नर्सिंग की छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पीड़ित पक्ष का आरोप है कि कोतवाली क्षेत्र के एक गांव में आरोपी पक्ष के लोगों ने पंचायत कर पांच लाख रुपये में समझौता करने का दबाव बनाया और पीड़िता के परिजनों द्वारा इंकार करने पर भुगत लेने की धमकी दी गई। पीड़ित परिवार गांव छोड़कर रिश्तेदारी में चला गया है। वहीं, पुलिस ने ऐसी किसी पंचायत की जानकारी से इंकार किया है। 

पीड़ित छात्रा के भाई ने बताया कि में आरोपी पक्ष के लोग उन पर लगातार फैसले का दबाव बना रहे हैं। बुधवार को गांव में आरोपी पक्ष के लोगों ने पंचायत कर उन्हें भी बुलाया था। पंचों ने पांच लाख रुपये रख कर कहा कि फैसला कर लो। यदि फैसला नहीं किया तो इसका अंजाम भुगतना पड़ेगा।

पीड़ित परिवार फैसले से इनकार कर पंचायत से लौट गया। आरोप है कि जान से मारने तक की धमकी दी जा रही हैं। पीड़िता के रिश्तेदारों को भी धमकाया जा रहा है। घटना के बाद भयभीत परिवार गांव छोड़कर अपनी रिश्तेदारी में अन्यत्र चला गया है। एसपी शैलेश कुमार पांडेय ने बताया कि पीड़ित परिवार ने कोई शिकायत नहीं की है। मामले की जांच कराई जाएगी। यदि पंचायत हुई है तो उसके आयोजकों के खिलाफ कार्रवाई होगी। 

छोटी बहन के साथ भी हो चुका है दुष्कर्म

बागपत के जिला अस्पताल में इलाज के दौरान सामूहिक दुष्कर्म की शिकार नर्सिंग की छात्रा की छोटी बहन ने यह कहकर सनसनी फैला दी कि उसके साथ भी तीन माह पहले दुष्कर्म किया गया था। इस किशोरी ने मीडिया के समक्ष गांव के ही एक युवक पर तीन माह पूर्व देहरादून ले जाकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाया है और बताया कि पुलिस ने उसे वहीं से बरामद किया था, लेकिन आरोपियों के दबाव में पुलिस ने उससे बयान बदलवा दिए थे। अब उसे इस मामले में इंसाफ चाहिए। 

17 वर्षीय किशोरी ने बताया कि जुलाई माह में वह घर से दुकान पर सामान लेने गई थी। रात्रि में उसे गांव का ही एक युवक मिला, जो उसकी ही कक्षा में पढ़ता था। किताबें दिखाने के बहाने वह उसे अपने घेर में ले गया और वहां नशा सुंघाकर बेहोश कर दिया। होश आया तो वह देहरादून में सुनसान जगह पर कमरे में बंधक थी। आरोपी ने सात दिन तक लगातार उसके साथ दुष्कर्म किया। एक सप्ताह बाद पुलिस उसे बंधन मुक्त कराया और वापस ले आई। इस मामले में आरोपी के खिलाफ कोतवाली में मुकदमा भी दर्ज कराया गया था। 

किशोरी ने आरोप लगाया कि पुलिस ने दबाव में आकर आरोपी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। मेडिकल के नाम पर महिला पुलिसकर्मियों ने उसे भयभीत कर दिया। सीएचसी में दो महिला पुलिसकर्मियों ने उसकी पिटाई की। पुलिस के डर से उसने न्यायालय में अपने बयान बदल दिए थे।  एसपी शैलेश कुमार पांडेय ने बताया कि पुलिस किसी पर बयान बदलने के लिए दबाव नहीं बनाती। किशोरी ने अभी तक पुलिस से शिकायत नहीं की है। यदि किशोरी शिकायत करती है तो जांच कराई जाएगी। 

सामूहिक दुष्कर्म के दोनों आरोपियों को भेजा जेल

जिला अस्पताल में नर्सिंग की छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में पुलिस ने दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया। कोर्ट से उन्हें जेल भेज दिया। वहीं, अस्पताल में पुलिस सुरक्षा में पीड़ित छात्रा का इलाज चल रहा है। जांच रिपोर्ट आने के बाद न्यायालय में छात्रा के बयान दर्ज कराए जाएंगे।  

सोमवार की रात में जिला अस्पताल में भर्ती बुखार से पीड़ित नर्सिंग की छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म करने वाले आरोपी वार्ड ब्वॉय यतेंद्र शर्मा उर्फ भूरा व प्रशिक्षु फार्मेसिस्ट दिलशाद को पुलिस ने बुधवार को न्यायालय में पेश किया। कोर्ट से दोनों को जेल भेज दिया है। वहीं, अस्पताल में भर्ती पीड़ित छात्रा का इलाज चल रहा है। उसकी हालत में काफी सुधार है। पुलिस छात्रा की कई तरह की जांच करा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद उसके न्यायालय में 164 के बयान दर्ज कराए जाएंगे।

जरनल वार्ड में भर्ती छात्रा की सुरक्षा में महिला पुलिस तैनात है। एसपी शैलेश कुमार पांडेय ने बताया कि छात्रा का मेडिकल कराया गया है। जांच रिपोर्ट आने में कुछ समय लगेगा। इसके बाद उसके न्यायालय में 164 सीआरपीसी के तहत बयान दर्ज कराए जाएंगे। छात्रा को डरने की कोई जरूरत नहीं है। उसकी पूर्ण सुरक्षा की जाएगी। 

सीएमएस ने की डॉक्टर और फार्मेसिस्ट के निलंबन की संस्तुति

जिला अस्पताल में नर्सिंग की छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में वार्ड ब्वाय और फार्मा प्रशिक्षु छात्र पर मुकदमे के बाद स्वास्थ्य विभाग की दो टीमों ने भी जांच शुरू कर दी है। सीएमएस डा. बीएलएस कुशवाह की ओर से गठित टीम ने घटना के वक्त इमरजेंसी में तैनात डॉ. भूपेंद्र कुमार और फार्मेसिस्ट मोहित त्यागी की लापरवाही पाई है।

सीएमएस ने प्रमुख सचिव और डीजी हेल्थ को दोनों के निलंबन की संस्तुति भेजी है। निगरानी नहीं रखने और पुलिस को देरी से सूचना देना भी वजह माना जा रहा है। सीएमएस ने मामले की जांच के लिए डा. सुनील कुमार, डा. अशोक लाठियान एवं डा. अंजू बाला की टीम बनाकर जांच कराई। सीएमएस ने बताया कि चिकित्सक व फार्मेसिस्ट की लापरवाही सामने आ रही है।

उन्होंने रात के समय एक बार भी मरीज को नहीं देखा। उनकी मौजूदगी में बड़ी घटना हुई है। उनके द्वारा गठित टीम मामले की गहराई से जांच कर रही है। जिस चिकित्सक या कर्मचारी की संलिप्तता पाई जाएगी, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने प्रमुख सचिव लखनऊ एवं डीजी हेल्थ को दोनों के निलंबन की संस्तुति भेज दी है।  उधर, डा. भूपेंद्र कुमार का कहना है कि किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती गई। रात्रि में 10:45 बजे उन्होंने बुखार से पीड़ित छात्रा को जनरल वार्ड में शिफ्ट करने के लिए कह दिया था, लेकिन मरीज के तीमारदारों ने उसे इमरजेंसी वार्ड में ही रखने के लिए कहा।

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