सप्रंग 2 की अपेक्षा मोदी सरकार में साम्प्रदायिक हिंसा में कम हुयी मौतें: गृह मंत्रालय

नई दिल्ली। देश में पिछले साल की तुलना में इस साल सांप्रदायिक हिंसा में कम लोगों की मौते हुई हैं। यह खुलासा हुआ है केंद्रीय गृह मंत्रालय की आई एक रिपोर्ट में, जिसमें दावा किया गया है कि मोदी सरकार के आने के बाद अब तक संप्रग-2 की मनमोहन सरकार की तुलना में कम सांप्रदायिक हिंसा में मरने वालों की तादाद में कमी आई है। 2015 में अक्टूबर तक ऎसी वारदातों में 86 लोगों की जान गई, जबकि इसी अवधि में पिछले साल यह आंकडा 90 था।

रिपोर्ट में कहा गया कि 2014 में अक्टूबर तक जहां छोटे-बडे 630 दंगों में 1899 लोग घायल हुए थे और 86 लोगों की मौत हुई थी, वहीं 2014 में पूरे सालभर में 644 घटनाएं हुईं और 1821 लोग घायल हुए थे और 95 लोगों की मौत हुई थी। गृह मंत्रालय ने बताया है कि इस साल अक्टूबर तक दो बडे सांप्रदायिक मामले सामने आए। पहला फरीदाबाद के अटाली में एक पूजा स्थल के निर्माण को लेकर हुई हिंसा और दूसरी दादरी के बिसाहडा गांव में गौवंश को मारने की अफवाह में मोहम्मद अखलाक की हत्या का।

मंत्रालय के मुताबिक, 2013 के आंकडों को लें तो उस वर्ष 823 सांप्रदायिक संघर्ष हुए जिसमें 133 लोगों की मौत हो गई और 2269 लोग घायल हुए। वहीं 2012 में 668 घटनाएं हुईं, जिसमें 94 लोगों को अपनी जान गंवानी पडी थी और 2117 लोग जख्मी हो गए थे।


रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर 2014 और 2013 में हुई सांप्रदायिक घटनाओं का महीने के आधार पर औसत निकालें तो 2014 में हर महीने लगभग 54 मामले सामने आए और 2013 में प्रति महीने 68 से कम मामले दर्ज हुए। 2013 में तब संप्रग सरकार केंद्र में थी। उस समय ही उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में सांप्रदायिक दंगे हुए थे। 2013 में बडे दंगे हुए थे। इसमें धुलिया (महाराष्ट्र) और मुजफ्फरनगर के बडे दंगे शामिल हैं। इनमें कुल 70 मौतें और 100 लोग घायल हुए थे। 2014 में राजग के कार्यकाल में सहारनपुर (यूपी) में बडे दंगे हुए। इसमें तीन लोगों की मौत हुई थी, जबकि 23 घायल हुए थे।


गृह मंत्रालय ने बताया है कि सांप्रदायिक हिंसा होने के पीछे सोशल मीडिया का दुरूपयोग एक सबसे बडा कारण है। इसके अलावा धार्मिक मामले, लिंग आधारित मसले, जमीन-जायदाद को लेकर विवाद और राजनीतिक दुश्मनी अन्य कारण हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 2011 और 2010 में क्रमश: 580 और 701 घटनाएं हुईं और इसमें क्रमश: 91 और 116 लोगों की जानें गईं और 1899 2138 लोग घायल हुए।

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