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गोरखपुर उपचुनाव में जब इस नेता ने बढ़ा दी थी सीएम योगी की टेंशन, जैसे-तैसे मिली थी जीत

नई दिल्ली: गोरखपुर लोकसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव में दो खेमों के बीच मुकाबला देखने को मिल रहा है. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रतिष्ठा से जुड़े इस सीट पर बीजेपी ने उपेन्द्र शुक्ला को प्रत्याशी बनाया है. वहीं समाजवादी पार्टी ने प्रवीण निषाद को प्रत्याशी बनाया है. बहुजन समाज पार्टी ने भी प्रवीण निषाद को समर्थन देने का फैसला लिया है.

इस सीट पर बीजेपी हमेशा की तरह जहां हिंदुत्व के मुद्दे पर ही चुनाव लड़ रही है, वहीं सपा-बसपा की दोस्ती वाले खेमे ने निषाद समाज से प्रत्याशी चुनकर जातीय समीकरण बिठाने की कोशिश की है. गोरखपुर लोकसभा सीट के इतिहास पर नजर डालें तो पता चलता है कि यहां हमेशा हिंदू कार्ड खेलने वाला प्रत्याशी बड़ेे अंतर से जीतते रहे हैं.

साल 1998 से योगी आदित्यनाथ खुद बड़े अंतर से चुनाव जीतकर यहां से संसद पहुंचते रहे हैं. महज एक बार ऐसा वाक्या हुआ है जब योगी आदित्यनाथ को इस सीट पर चुनौती मिली है. वरिष्ठ पत्रकार सत्येंद्र सिंह बताते हैं कि साल 1967 के आम चुनाव में गोरखनाथ मंदिर के प्रमुख महंत दिग्विजयनाथ हिन्दू महासभा के टिकट पर गोरखपुर के सांसद बने थे. इसके साथ ही गोरखपुर की राजनीति में मंदिर का प्रभाव आ गया था. उन्होंने बताया कि गोरखनाथ की राजनीति में मंदिर का प्रभाव आने के साथ ही यहां हमेशा से हिन्दुत्व का कार्ड खेलने वाले प्रत्याशियों की बड़े अंतर से जीत होती रही है.

साल 1999 में जैसे-तैसे जीते थे योगी आदित्यनाथ
योगी आदित्यनाथ गोरखपुर सीट से पांच बार (2014, 2009, 2004, 1999, 1998) सांसद बने. इनमें से चार बार उनका मुकाबला जमुना प्रसाद निषाद और उनके परिवार से रहा. एक बार पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी के बेटे विनय शंकर तिवारी से योगी का मुकाबला हुआ. शुरुआती दो चुनावों में जमुना प्रसाद निषाद ने योगी आदित्यनाथ का जबरदस्त टक्कर दी थी. 1998 के चुनाव में जीत-हार का अंतर महज 26206 रहा. इसके अगले साल साल 1999 में दोबारा चुनाव हुआ तो योगी आदित्यनाथ को जमुना प्रसाद निषाद ने और भी कड़ी टक्कर दी और जीत हार का अंतर महज 7339 पर सिमट गया. 

इन दो चुनावों में टक्कर मिलने के बाद योगी आदित्यनाथ ने 2004 के चुनाव में प्रचार को पूरी तरीके से हिंदू बनाम मुस्लिम कर दिया था. वे अपने भाषणों में कहने लगे थे कि कोई परिवार किसी भी पार्टी का सपोर्टर हो लेकिन, अगर वह हिंन्दू है तो उसके एक सदस्य को उन्हें जरूर वोट देना चाहिए. योगी को इस प्रचार का फायदा भी मिला और 2004 के चुनाव में उन्होंने जमुना प्रसाद निषाद को 142039 वोटों से हराया. 

कट्टर हिन्दुत्व की छवि बनने के बाद योगी आदित्यनाथ साल 2009 के आम चुनाव में पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी के बेटे विनय शंकर तिवारी को 220271 वोटों से हराया. साल 2014 में एक बार फिर योगी आदित्यनाथ का मुकाबला जमुना प्रसाद निषाद की पत्नी राजमति निषाद से हुआ, जिसमें योगी आदित्यनाथ ने उन्हें रिकॉर्ड 312783 मतों से शिकस्त दी.

इस बार सपा-बसपा के साझा उम्मीदवार प्रवीण निषाद हैं. वहीं सीएम योगी आदित्यनाथ के आशीर्वाद से उपेंद्र शुक्ला बीजेपी से ताल ठोंक रहे हैं. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में पड़े वोटों पर नजर डालें तो यहां योगी आदित्यनाथ को 538604, सपा की राजमति निषाद ने 226216, बसपा के रामभुआल निषाद ने 176277 व कांग्रेस के अष्टभुजा प्रसाद त्रिपाठी ने 45693 मत हासिल किए थे. सपा और बसपा के एक साथ आने के बाद के चुनावी गणित को समझें तो दोनों पार्टियों को मिले वोटों की संख्या 402493 है. हालांकि यह संख्या अब भी योगी को मिले वोटों से कम है, लेकिन यहां गौर करने वाली बात यह है कि इसमें काफी वोट ऐसे होंगे जो योगी के चेहरे के नाम पर पड़े होंगे.

 

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