कुरियर से भेजे गए 2000 कारतूस, खोलने पर निकली गिट्टियां

लखनऊ। कानपूर में हुई एक घटना ने जिला प्रशासन के होश उडा दिए हैं। लखनऊ से भेजे गए 315 बोर के दो हजार कारतूस यहाँ पहुँचने से पहले गिट्टी बन गए हैं। यानि कारतूस गायब हो गए। ये कारतूस कानपुर के एक गन हाउस ने लखनऊ के गन हाउस से मंगाए थे। मेस्टन रोड स्थित गन हाउस के मालिक ने कुरिअर से आई बोरी खोलकर देखी तो उसमें कारतूस नहीं थे। नक्सली और आतंकी घटनाओं के बीच इन कारतूसों के गायब होने से प्रशासन में हड़कंप मचा है। एडीएम सिटी अविनाश सिंह ने मामले की जांच सिटी मजिस्ट्रेट को दी है।

बाला जी गन हाउस, मेस्टन रोड के मालिक जय करन सिंह ने जिला प्रशासन से एनओसी और लखनऊ जिला प्रशासन से टीएल (ट्रैवलिंग लाइसेंस) लेकर पापुलर गन हाउस लखनऊ से आठ अगस्त को दो हजार कारतूस मंगाए थे। पापुलर गन हाउस ने ये कारतूस सेफ एक्सप्रेस कुरिअर से बोरी में भरकर भिजवाए।

यह बोरी 10 अगस्त को बालाजी गन हाउस पहुंची। मालिक जय करन ने कुरिअर लाने वाले व्यक्ति के सामने ही बोरी खोली तो उसमें गिट्टियां निकलीं। उन्होंने कुरिअर लाने वाले से तुरंत लिखवाया कि बोरी में गिट्टियां हैं। कुरिअर कंपनी के ब्रांच मैनेजर, लखनऊ और कानपुर के जिलाधिकारी को पत्र लिखकर सूचना भी दी। डीएम को लिखे पत्र में बताया है कि पापुलर गन हाउस का कहना है वहां से कारतूस ही भेजे गए। इन सबके बीच मामले की फाइल कलक्ट्रेट में पड़ी रही। किसी व्यक्ति से यह बात बुधवार को एडीएम सिटी को पता चली तो उन्होंने असलहा विभाग के बाबुओं से पूछताछ की।

खोजबीन कर फाइल एडीएम सिटी को दी गई। बताया गया कि जिलाधिकारी को मामला बता दिया गया था। दो हजार कारतूस गायब होने के मामले में असलहा विभाग लापरवाह बना रहा। अगस्त में गायब हुए कारतूस की खबर का मामला एडीएम सिटी को किसी व्यक्ति के बताने पर अब एकदम से सामने आया। आखिर असलहा विभाग में अगस्त से यह फाइल कैसे दबी रही, इतने बड़े मामले पर भी रिपोर्ट क्यों नहीं दर्ज कराई गई, तब किसी अफसर से जांच क्यों नहीं कराई गई जैसे सवालों के जवाब किसी के पास नहीं हैं।

जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा कहते हैं कि मुझे मामले के बारे में एडीएम सिटी ने बताया है। मामला काफी गंभीर है। प्रथम दृष्टया कोरियर कंपनी या कारतूस भेजने वाले लखनऊ के पापुलर गन हाउस की भूमिका संदिग्ध लग रही है। इसकी जांच एडीएम सिटी ने सिटी मजिस्ट्रेट को दी है। अब यह प्रश्न उठता है कि फाइल इतने दिनों तक कैसे दबी रही तो इसकी भी जांच कराई जाएगी। दोषी पाए गए असलहा विभाग के कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी।

वहीं एडीएम सिटी अविनाश सिंह कहते हैं कि मुझे किसी व्यक्ति से कारतूस गायब होने की बात अब पता चली। असलहा विभाग से फाइल मंगाकर देखी है। मामला गंभीर है। फाइल पर लगे कागजों से यह स्पष्ट नहीं हो रहा है कि आखिर कारतूस गए तो कहां गए। मामले की जांच सिटी मजिस्ट्रेट को दी गई है। उनसे एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी गई है।

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