डायबिटीज: बिना लक्षणों के भी शरीर में पनपती रहती है यह बीमारी

लखनऊ। लक्षण के न होने पर भी आपको डायबटीज हो सकती है। अतः सभी को इस बात की सलाह दी जाती है कि वह मधुमेह के लिये अपने रक्त की जाॅच अपने चिकित्सालय में समय समय पर अवश्य कराते रहे जिससे बिमारी का जल्द से जल्द पता चल जाय एवं इलाज भी जल्द से जल्द शुरू हो जाये एवं इस तरह डायबटीज के कंप्लीकेशन से बचा जा सकें। यह कहना है डा0 राजीव कपूर का।
पूर्वोत्तर रेलवे मंडल चिकित्सालय, बादशाहनगर के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. कपूर ‘विश्व मधुमेह दिवस’ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मधुमेह की बढती हुयी संख्या पर चिंता व्यक्त कर रहे थे। अपर मण्डल रेल प्रबन्धक एसके सपरा की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में डा. कपूर ने कहा कि मधुमेह रोग पर अगर नियंत्रण न किया गया तो यह कई रोगो और स्वास्थ्य समस्याओं को बुलावा देता है एवं हृदय, किडनी, एवं आॅख इत्यादि के रोग होने का खतरा बढ जाता है।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने सलाह दी की  मधपान एवं धूम्रपान न किया जाए, नियमित रूप से व्यायाम किया जाए, 30 से 45 मिनट की सैर बहुत लाभदायक है। खान-पान पर विषेश ध्यान दिया जाए । तनाव को कम करने के लिए योग एवं मैडिटेषन लाभप्रद है। कुल मिलाकर उनके द्वारा इस बात पर बल दिया गया कि लाइफ स्टाईल मौडिफिकेशन बहुत जरूरी है।  बताया गया कि कभी कभी रक्त में ग्लूकोज की कमी हो जाने के कारण एक गंभीर समस्या पैदो होती है जिसे हाइपोग्लाइसेमिया कहते है यदि इसका अतिशीघ्र उपचार नहीं किया गया तो मरीज  की मौत  भी हो सकती है।
मरीज यह होश मे हो तो उसे शर्करायुक्त भोजन जैसे शरबत चीनी, ग्लूकोज का घोल दिया जाना चाहिए और इससे मरीज तुरंत ही वेहतर महसूस करने लगता है । यदि मरीज बेहोश हो जाता है तो उसे ग्लूकोज दिया जाता है । उनके द्वारा यह बताया गया कि मधुमेह के मरीज को अपने पास हमेशा यह पहचान पत्र रखना चाहिए एवं पहचान पत्र के साथ साथ कुल शर्करा युक्त पदार्थ रखना चाहिए ताकि समस्या पैदा होने पर उपचार शीघ्र मिल सकें।
इस अवसर पर डा. रंजीत, सहायक मंडल चिकित्साधिकारी द्वारा मधुमेह के प्रकार (जेैसे टाईप1, टाईप।। डायबटीज एंव जेसटेशनल डायबटीज प्रेगनेन्सी में बताया) एवं लक्षण जैसे प्यास लगना, पेशाब आना, भूख लगता, वजन का घटना, थकावत महसूस होना बताते हुये समय से दवाइयों एवं इंसुलिन से उपचार पर विशेष बल दिया।
डा. कुमार उमेश ने मधुमेह पर व्याख्यान देते हुये डायबटिज का हृदय रोग एवं टीबी से संबंध पर प्रकाश डालते हुये यह बताया कि हर तीन माह पर एचबीए 1सी की जाॅच, ब्लड प्रेशर को कंट्रोल  में रखना एवं चर्बी युक्त भोजन खाने से परहेज करने की सलाह देते हुये लोगों को जागरूक किया एवं चेहरे से ज्यादा पेैर की देखभाल हेतु सलाह दी उक्त को करने से मरीज स्वस्थ जीवन एवं एक्टीव लाईफ व्यतीत करता है।
मधुमेह के लिए दवाई इंजेक्शन इंसुलिन पर भ्रान्तियों को क्लेरीफाई करते हुए उन्होंने बताया कि इंसुलिन बहुत ही लाभप्रद है और यह मरीजों का दोस्त है। 45 वर्ष से अधिक उम्र के व्यक्ति एवं हाई रिस्क व्यक्ति जैसे धूम्रपान करने वाले व्यक्ति, ओबीज व्यक्ति को अपने शुगर की जाॅच एक नियमित अंतराल पर कराना अत्यन्त आवश्यक है ताकि बिमारी का पता चल सके एवं आदमी सावधानी बरतने लगे और अपना उपचार शुरू कर दे। इस अवसर पर मधुमेह से संबंधित प्रदर्शनी लगायी गयी इस बिमारी से संबंधित पंपलेट्स का भी वितरण अपर मंडल रेल प्रबंधक एस.के.सपरा, डा. राजीव कपूर, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक द्वारा वितरण किया गया ।

 

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