सरकार ने 15 क्षेत्रों में एफडीआई के लिए नियम किये आसान

नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ब्रिटेन तथा तुर्की यात्रा से पहले मंगलवार को सरकार ने रक्षा, विनिर्माण, निर्माण, कृषि, एकल ब्रांड खुदरा कारोबार एवं थोक कारोबार, निजी बैंक, नागरिक उड्डयन, खनन और प्रसारण समेत 15 उद्योग क्षेत्रों में विदेशी पूंजी आकर्षित करने के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नीति में भारी बदलाव करने की घोषणा की।

केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने बताया कि इन क्षेत्रों में एफडीआई संबंधी नियमों में ढील देते हुए भारी बदलाव किए गए हैं, निवेश की सीमा बढ़ा दी गयी है। खनन एवं खनिज में टाईटेनियम अलगब अलग करने और भागीदारी में उत्तरदायित्व कम करने जैसे फैसले भी किए गए है। सरकार ने यह फैसला प्रधानमंत्री की ब्रिटेन एवं तुर्की की यात्रा से पहले लिया है। तुर्की में प्रधानमंत्री औद्योगिक देशों के समूह जी-20 की बैठक में भी हिस्सा लेंगे।

जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड को एफडीआई प्रस्तावों को अनुमोदन देने की सीमा 3000 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 5000 करोड़ रुपए कर दी गयी है। एफडीआई में किए गए इन बदलावों से देश में विदेशी निवेश आने की प्रक्रिया अनुकूल, आसान और तर्कसंगत होगी और ऑटोमेटिक रूट के जरिए ज्यादा विदेशी पूंजी देश में आएगी और समय की बचत होगी। खुदरा एवं थोक कारोबार तथा ई कॉमर्स को विनिर्माण क्षेत्र के लिए खोलने से मेक इन इंडिया को बढ़ावा मिलेगा।

सरकार ने पिछले दिनों रक्षा तथा रेलवे समेत कई क्षेत्रों को एफडीआई के लिए खोला था लेकिन प्रक्रियागत कठिनाई के कारण अपेक्षित परिणाम सामने नहीं आ रहे थे। इन बदलावों का उद्देश्य निवेशकों के अनुकूल माहौल तैयार करना और प्रक्रिया आसान बनाना है। सरकार का मानना है कि एफडीआई में इन बदलावों से रोजगार के अवसर सृजित करने में मदद मिलेगी और गरीबी का उन्मूलन हो सकेगा।

इनसे भारत को विनिर्माण का केंद्र बनाने में भी मदद मिलेगी। सरकार ने इससे पहले भी एफडीआई में कई बाधाओं को हटाया है और वित्तीय दबावों को कम किया है और इसका असर दिखने लगा है। एफडीआई में सुधार से मेक इन इंडिया, स्किल इंडिया और स्टार्ट अप इंडिया जैसे अभियानों को बढावा मिलेगा। सरकार ने अनिवासी भारतीय के लिए भागीदारी उत्तरदायित्व, निवेश, मंजूरी प्रक्रिया में बदलाव करते हुए मालिकाना हक और कंपनी स्थापना में भी ढील दी है। ये बदलाव 15 उद्योग क्षेत्रों में कृषि एवं पशुपालन, बागवानी, खनन एवं खनिज में टाईटेनियम को अलग करने और इसमें मूल्य संवर्द्धन करना, रक्षा, प्रसारण, निजी बैंक, विनिर्माण, निर्माण, एक ब्रांड  खुदरा एवं थोक कारोबार और नागरिक उड्डयन शामिल है। इसके अलावा कई क्षेत्रों में एफडीआई की सीमा बढ़ा दी गयी है।

भागीदारी उत्तरदायित्व और अनिवासी भारतीयों की कंपनी स्थापना में बदलाव करने से एफडीआई के प्रवाह में इजाफा होगा। इसके अलावा औद्योगिक नीति एवं विकास विभाग को एफडीआई से संबंधित सभी दिशा निर्देशों को एक पुस्तिका के रुप में लाने का सुझाव दिया गया है। विज्ञप्ति में कहा गया है कि 16 क्षेत्रों में कंपनी शुरू करने के लिए सामान्य तौर पर एक वर्ष से ज्यादा का समय लगता है। एफडीआई के क्षेत्र में किए गए इन बदलावों से भारतीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी और विश्वभर से प्रौद्योगिकी भारत आएगी।

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