असली नाम बताना छोटा राजन को पड़ा भारी

नयी दिल्ली । छोटा राजन के लिए उसे अपना असली नाम बताना भारी पड़ गया। हुआ यूं कि इंडोनेशिया के बाली में आव्रजन अधिकारियों ने एक व्यक्ति से कतार से बाहर आने को कहा और फिर उसका नाम पूछा, तो उसने अपना जो नाम बताया, वह उसे मुसीबत में डालने के लिए काफी था। वजह, इसी नाम ने मोहन कुमार उर्फ छोटा राजन को सुरक्षाकर्मियों के घेरे में ला दिया और उसे तत्काल गिरफ्तार कर लिया गया।

सीबीआई सूत्रों ने आज बताया कि जब उससे बाली में आव्रजन अधिकारियों ने कतार से बाहर आने और अपनी पहचान बताने को कहा, तो राजन ने मोहन कुमार की बजाय अपना असली नाम राजेन्द्र सदाशिव निकाल्जे बताया, जैसा उसके पासपोर्ट में दर्ज है। बकौल सूत्र, इतना सुनते ही इंडोनेशिया के अधिकारियों को विश्वास हो गया कि यह वही व्यक्ति है जिसके खिलाफ रेड कार्नर नोटिस जारी किया गया है। अधिकारियों ने इसके बाद पहचान की प्रक्रिया शुरू की और नोटिस में दिए गए फिंगर प्रिंटस के 18 प्वाइंटस में से 11 का मिलान हो गया, जिससे उसकी पहचान की पुष्टि हुई। सूत्रों ने कहा कि उसे जल्द रिमांड के लिए मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाएगा।

वहीँ, छोटा राजन के मुंबई आगमन ने यूपी के जेलों में बंद उसके गैंग के शातिर गुर्गों को जोश से भर दिया है। गैंग के सदस्य जहां एक बार सक्रिय हो रहे हैं, वहीं जेलों में बंद अपने आकाओं से लगातार ऐसी बातें कर रहे हैं, जिसने यूपी पुलिस क्या खुफिया एजेंसियों की नींद उड़ा दी है। यह खुलासा खुफिया एजेंसियों ने छोटा राजन गैंग के इलाहाबाद, खण्डवा और ग्वालियर जेलों में बंद गुर्गों की सर्विलांस के दौरान हुआ है। इलाहाबाद जेल में बंद एक शार्प शूटर ने तो अपने शरीर पर कई जगह ‘नाना….नाना’ लिखवा रखा है।

छोटा राजन के इंडोनेशिया में आने की खबर क्या फैली, उसके जेलों में बंद गुर्गों की खुशियों का ठिकाना नहीं है। एसटीएफ के साथ ही खुफिया एजेंसी इन गैंगों पर नज़र रख रही थीं। खुफिया एजेंसी की फिक्र इसलिए थी कि छोटा राजन गैंग को खाद पानी यूपी के पूर्वांचल के कई जिलों और मध्य प्रदेश से पहुंचाया जाता है। इसी मद्देनज़र अब एसटीएफ ने भी सर्विलांस शुरू की है।

खुफिया की मानें तो यूपी और मध्य प्रदेश की जेलों में बंद छोटा राजन उर्फ नाना के गुर्गे मुंबई, पुणे और गोवा के कई बड़े व्यापारियों से लाखों की हर महीने अब भी वसूली कर रहे हैं। एसटीएफ और खुफिया की फिक्र है कि जिस तरह गैंग उत्साहित है, उससे जरूर जेलों से गैंग की वसूली का धंधा जोर पकड़ सकता है। एसटीएफ ने तीन दिन पहले ही छोटा राजन गैंग की सुपारी लेने वाले तीन बदमाशों को  इलाहाबाद में गिरफ्तार किया है लेकिन अन्य जेलों में भी सक्रियता के चलते अब चुनिंदा इंस्पेक्टरों की टीम को खासतौर पर सर्विलांस के लिए लगाया गया है।

खुफिया एजेंसियों की मानें तो गैंग में तीन महिलाएं भी हैं। उनका जिम्मा गैंग के शूटरों को नगदी मुहैया कराना और वसूली की रकम का हिसाब रखना है। इनमें से एक का नाम ‘शाहीन’ है। शाहीन के पास इस वक्त मुंबई से हाल ही में आई तीन लाख रुपये की नगदी गैंग ने रखवाई है।

इधर, दिल्ली पुलिस ने गैंगस्टर छोटा राजन के लिए सवालों की सूची तैयार की है। यह जिम्मेदारी विशेष सेल को दी गई है और पूरा ध्यान मुख्य रूप से अंडरवर्ल्ड तथा आतंकी संगठनों के बीच कथित सांठगांठ पर होगा। राजन को यहां लाए जाने के बाद दिल्ली पुलिस के शीर्ष अधिकारियों ने एक बैठक करके संयुक्त पूछताछ और गैंगस्टर की सुरक्षा सहित कई मुद्दों पर चर्चा की।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि दिल्ली में छोटा राजन से जुड़े छह मामले हैं। हालांकि हमारी पूछताछ इन तक सीमित नहीं होगी और हम आईएस सहित विभिन्न आतंकी संगठनों के साथ अंडरवर्ल्ड के कथित संबंधों के बारे में और जानकारी हासिल करने का प्रयास करेंगे। वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि राजन के मामले में खतरे की आशंका बहुत ज्यादा है क्योंकि उसे उसके अंडरवर्ल्ड के दुश्मनों द्वारा निशाना बनाया जा सकता है। खतरे की आशंका के बारे में पूछे जाने पर दिल्ली पुलिस आयुक्त बीएस बस्सी ने कहा, जरूरी सुरक्षा उपाय किये जाएंगे।

एक अन्य अधिकारी ने कहा कि अनुमति मिलने पर राजन से पूछताछ डीसीपी संजीव कुमार यादव के नेतृत्व में की जा सकती है, क्योंकि उन्हें आतंकवाद निरोधक अभियानों का विशेषज्ञ माना जाता है। यहां तक कि दक्षिण दिल्ली के लोधी कालोनी में विशेष सेल की इकाई में एक वैकल्पिक हिरासत केन्द्र तैयार रखा गया है।

छोटा राजन ने दिल्ली पहुंचते ही दाऊद के राज खोलने शुरु कर दिए हैं। राजन ने दाऊद के स्थानीय नेटवर्क के अलावा उसके मध्य एशिया में फैले नेटवर्क से जुड़ी अहम जानकारी पूछताछ करने में जुटी कई जांच एजेंसी को दी है। रॉ, आईबी, सीबीआई और दिल्ली पुलिस से लैस मल्टी एजेंसी टीम ने राजन से दिल्ली पहुंचते ही ज्यादातर सवाल ऐसे किए हैं, जिससे देश के दुश्मन दाऊद का राज सामने आ सके। पूछताछ में हो रहे खुलासों से पूरी मुंबई में दाऊद के फैले साम्राज्य से परदा हटने की उम्मीद जताई जा रही है। सूत्रों का कहना है कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष हो, इसलिए ही सारे केस सीबीआई को स्थानांतरित किए गए हैं। सीबीआई पूछताछ और जांच के बाद ही राजन पर आरोपों की फेहरिश्त तैयार करेगी।

राजन से अब तक पूछा गया है कि वह दाऊद के साथ कितने समय तक रहा। दाऊद के लिए वह क्या काम करता था। मुंबई में उसे कौन से लोग सहयोग करते थे। अभी भी मुंबई या बाहर कौन से लोग हैं जो दाऊद के लिए काम कर रहे हैं। राजन से यह भी पूछा गया है कि उसका दाऊद से रिश्ता समाप्त होने के बाद कभी फोन या अन्य माध्यमों से संपर्क हुआ या फिर वह दाऊद के लोगों के संपर्क में है या नहीं।

छोटा राजन के सारे केस सीबीआई को सौंपने के महाराष्ट्र सरकार के फैसले पर राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस और एनसीपी ने सरकार के इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा है कि इससे मुंबई पुलिस का मनोबल टूटा है। हालांकि, भाजपा ने सरकार का बचाव करते हुए कहा है कि सरकार का फैसला सही है और मुंबई पुलिस का मनोबल नहीं टूटा है।

राज्य के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) केपी बक्शी ने गुरुवार को राज्य सरकार के फैसले के बाद प्रेस कांफ्रेंस में घोषणा की कि राजन के सारे केस की जांच सीबीआई करेगी और उसके सारे केस के दस्तावेज सीबीआई को सौंप दी जाएगी। मुंबई पुलिस जांच में सीबीआई को सहयोग करेगी।

राज्य सरकार के इस फैसले के बाद कांग्रेस और एनसीपी आक्रमक भूमिका में है। मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष संजय निरूपम ने सरकार से सवाल किया है कि राजन के सारे प्रकरण की जांच सीबीआई को सौंपने से मुंबई पुलिस क्या करेगी? इसी तरह एनसीपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता नवाब मलिक ने कहा कि राज्य सरकार ने शीना बोरा हत्या कांड के बाद अब राजन प्रकरण की जांच मुंबई पुलिस से छीनकर सीबीआई को क्यों सौंपी है। सरकार का पुलिस पर भरोसा नहीं है, तो जनता पुलिस पर विश्वास कैसे करेगी?

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के पास ही गृह विभाग भी है। इसलिए विधान परिषद में विपक्ष के नेता धनंजय मुंडे ने मुख्यमंत्री पर निशाना साधते हुए सवाल किया है कि राजन के अपराध की जांच करने में राज्य का गृह विभाग और मुंबई पुलिस सक्षम नहीं है क्या ? राज्य के इतिहास में पहली बार अपराधी के कहने पर जांच यंत्रणा बदली गई है? मुंबई पुलिस की तुलना स्काॠटलैंड यार्ड पुलिस से की जाती है। लेकिन राज्य के गृह विभाग को सीबीआई पर भरोसा है।

 

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