सिस्टम के विरोध में अब फिल्मकरों ने भी लौटाया नेशनल अवॉर्ड

नई दिल्ली। सरकार के विरोध में साहित्यकार, फिर वैज्ञानिक और अब फिल्मकार खुलकर में उतर आए हैं। जानेमाने फिल्मकार दिबाकर बनर्जी, आनंद पटवर्धन और आठ अन्य  ने आज एफटीआईआई के आंदोलनकारी छात्रों के साथ एकजुटता प्रकट करते हुए साथ ही देश में बढ़ती असहिष्णुता के विरोध में अपने राष्ट्रीय पुरस्कार लौटा दिए।

बनर्जी और अन्य फिल्मकारों ने कहा कि वे छात्रों के मुद्दों के निवारण तथा बहस के खिलाफ असहिष्णुता के माहौल को दूर करने में सरकार की ओर से दिखाई गई उदासीनता के मद्देनजर ये कदम उठाए हैं।

बनर्जी ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘मैं गुस्से, आक्रोश में यहां नहीं आया हूं। ये भावनाएं मेरे भीतर लंबे समय से हैं। मैं यहां आपका ध्यान खींचने के लिए हूं, ‘खोसला का घोसला’ के लिए मिला अपना पहला राष्ट्रीय पुरस्कार लौटाना आसान नहीं है।

यह मेरी पहली फिल्म थी और बहुत सारे लोगों के लिए मेरी सबसे पसंदीदा फिल्म थी। उन्होंने कहा, ‘‘अगर बहस, सवाल पूछे जाने को लेकर असहिष्णुता तथा पढ़ाई के माहौल को बेहतर बनाने की चाहत रखने वाले छात्र समूह को लेकर असहिष्णुता होगी, तो फिर यह असहिष्णुता उदासीनता में प्रकट होती है। इसी को लेकर हम विरोध जता रहे हैं।

जानेमाने डाक्यूमेंटरी निर्माता पटवर्धन ने कहा कि सरकार ने ‘अति दक्षिणपंथी धड़ों’ को प्रोत्साहित किया है। साथ ही उन्होंने कहा, ‘‘मैंने इस तरह से एक समय पर बहुत सारी घटनाएं होती नहीं देखी हैं।

क्या होने वाला है, यह उसकी शुरूआत है और मुझे लगता है कि पूरे देश में लोग अलग अलग तरीकों से प्रतिक्रिया दे रहे हैं,’’ एफटीआईआई के छात्रों ने आज अपनी 139 दिनों पुरानी हड़ताल खत्म कर दी, हालांकि वे संस्थान के अध्यक्ष पद पर गजेंद्र चौहान की नियुक्ति का विरोध एवं उनको हटाने की मांग जारी रखेंगे।

उर्स ने कहा, ‘‘परन्तु हम इसका इस्तेमाल केवल यह कहने के लिए नहीं कर रहे है कि हम शिक्षा की ओर वापस जा रहे हैं बल्कि हम इस मौके का इस्तेमाल फिल्मनिर्माताओं, शिक्षाविदों और देश के नागरिकों से आह्वान करने के लिए करना चाहते हैं कि वे इस लड़ाई को आगे ले जाएं।

उन्होंने यह भी कहा कि परिसर अभी भी ऐसी तख्तियों और चित्रों से भरा हुआ है जिसमें ‘‘लोकतंत्र पर हमले’’ की निंदा की गई है। छात्रों को प्रताड़ित करने की संभावना को लेकर पूछे गए सवाल पर एक अन्य छात्र प्रतिनिधि राकेश शुक्ल ने कहा, ‘‘हमें निश्चित तौर पर इसका भय है”।

एफटीआईआई हड़ताल ने पूरे देश का ध्यान आकृष्ट किया और भारतीय सिनेमा की प्रमुख हस्तियों ने आंदोलन को अपना समर्थन दिया था। 20 अक्तूबर को आंदोलनकारी छात्रों और राठौड़ के बीच दिल्ली में बातचीत हुई थी लेकिन वह गतिरोध समाप्त करने में असफल रही थी।

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