मुस्लिम संगठन बना रहे नया मोर्चा, ऐलान 19 को

लखनऊ। आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर मुस्लिम संगठन आपस में मिलकर नया फ्रंट तैयार करने जा रहे हैं। इस फ्रंट में मुस्लिम आवाम की पैरवी करने वाले सभी छोटे-छोटे दलों को शामिल किया जा रहा हैं। आगामी 19 जुलाई को इस फ्रंट का ऐलान किया जायेगा। इस मोर्चे में ओवैसी की पार्टी , कौमी एकता दल तथा पीस पार्टी सहित करीब आधा दर्जन दलों को शामिल किया गया हैं। इसके पीछे मुस्लिम संगठनों के नेताओं का तर्क है कि इसके जरिए मुस्लिम मतों के बीच बिखराव को रोकने की कोशिश की जाएगी। इस मोर्चे को सपा, बसपा, बीजेपी और कांग्रेस के विकल्प के रूप में पेष करने की तैयारी चल रही है।

पीस पार्टी के अध्यक्ष डॉ. अय्यूब ने बताया कि सभी मुस्लिम संगठन को एकजुट कर चुनाव में मजबूती से उतरने की कोशिश की जा रही है। अभी तक सपा, बसपा, कांग्रेस ने मुस्लिम मतों का जरूरत के मुताबिक इस्तेमाल ही किया है। किसी भी दल ने मुस्लिम वर्ग की तरक्की के लिए कोई काम नहीं किया है। इसमें वेलफेयर पार्टी ऑफ इंडिया, सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया, मुस्लिम महाज, इंडियन मुस्लिम लीग, परचम पार्टी और मुस्लिम मजलिस शामिल हैं।

मुस्लिम संगठन के एकजुट होने से सबसे ज्यादा नुकसान सपा, बसपा और फिर कांग्रेस को होगा। अभी तक सपा का बेस वोट यादव और मुस्लिम ही रहा है। पार्टी के पास आजम खान जैसा कद्दावर चेहरा भी है। वहीं, जिस तरह से बसपा दलित-मुस्लिम समीकरण को लेकर चल रही है, उसमें ये नया फ्रंट पार्टी को कमजोर कर सकता है। कांग्रेस ने मुस्लिम मतों को एकजुट करने के लिए भले ही गुलाम नबी आजाद को भेज दिया है, लेकिन इस ऑप्शन के आगे कांग्रेस के स्टैंड करने में आशंका बनी है।

प्रदेश में मुस्लिम आबादी पर गौर करें तो 21 जिलों में मुस्लिम वोटर्स की संख्या 19 फीसदी तक है। रामपुर के बाद मुरादाबाद, बिजनौर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, ज्योतिबा फुले नगर और बलरामपुर में इनकी आबादी 37 से 47 फीसदी तक है। इसके अलावा मेरठ, बहराइच, श्रावस्ती, सिद्धार्थनगर, बागपत, गाजियाबाद, पीलीभीत, संतकबीरनगर, बाराबंकी, बुलंदशहर, बदायू और लखनऊ में भी काफी मुस्लिम मतदाता हैं।

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