यूपी: 22 लाख बच्चों ने अपने परिवार के लिए छोड़ा स्कूल

लखनऊ। भारतीय शिक्षा से जुडी एक चौंका देने वाला खुलासा सामने आया है। इस खुलासे में जो बात सामने आई है वह यह है कि  इस समय देश के 61 लाख बच्चे अभी शि‍क्षा की पहुंच से दूर है।

इन आंकड़ों में सिर्फ 26 प्रतिशत यानि 16 लाख बच्चें उत्तर प्रदेश के हैं। इन बच्चोंं में स्कूल जाने वाले बच्चों में भी 59 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं जो ठीक से पढ़ नहीं पाते हैं। यह आंकड़े मंगलवार को यूनिसेफ की वार्षिक रिपोर्ट द स्टेट ऑफ द वर्ल्डंस चिल्ड्रेन ने जारी किए हैं।

इस रि‍पोर्ट में कहा गया है कि‍ अगर सरकारी स्तरर से लेकर कारपोरेट सेक्टार व अंतर्राष्ट्रीरय संगठनों की तरफ से गरीब परि‍वारों की मदद नहीं की गयी तो आने वाले समय में शिक्षा व्यवस्था बेहद भयानक हो सकती है।

रिपोर्ट में अफ्रीका के उप सहारा क्षेत्र तथा दक्षिण एशिया में रहने वाले पांच वर्ष से कम की उम्र के बच्चों से जुड़े तथ्य को शामि‍ल कि‍या गया है। इन इलाकों में माध्यमिक शिक्षा हासिल कर चुकी माताओं के बच्चों की तुलना में अशिक्षित माताओं के बच्चों की मौत का आंकड़ा लगभग तीन गुना ज्यादा है।

अमीर घरों की लड़कियों की तुलना में गरीब घरों की लड़कियों की बचपन में ही शादी हो जाने से दोगुना बच्चोंन के बीच के अंतर को समाप्तं करने में शि‍क्षा का अहम रोल है।जिला अस्पतालों में 74 लाख बच्चों का वजन जन्म के समय ढाई किलो से कम होता है, साथ ही लगभग 35 हजार बच्चों की मौत सही पोषण न मिलने के कारण पांच वर्ष से कम आयु में हो रही है।

इसमें कहा गया है कि‍ पूरी दुनिया में आज करीब 12.4 करोड़ बच्चे प्राथमिक अथवा निम्न  माध्यमिक स्तर के स्कूलों में पढऩे नहीं जाते हैं।लगभग 5 में से 2 ऐसे बच्चें हैं जिन्होंने प्राथमिक स्कूलों की पढ़ाई पूरी कर ली है लेकिन उन्हें पढऩा-लिखना या सरल गणित भी नहीं आती है।रि‍पोर्ट में इस तथ्यी को स्वी कार कि‍या गया है कि‍ मत्युलदर को कम करने में सफलता मि‍ल रही है। वर्ष 1990 से अब तक पूरी दुनिया में पांच वर्ष से कम की उम्र के बच्चों की मृत्यु दर आधे से भी कम रह गई है।

129 देशों में प्राथमिक स्कूलों में पढऩे वाले विद्यार्थियों में लड़कों और लड़कियों की संख्यार बराबर है। वर्ष 1990 की तुलना में पूरी दुनिया में बेहद गरीबी में गुजारा करने वाले लोगों की तादाद भी लगभग आधी रह गई है। पांच वर्ष की उम्र से पहले मरने वाले गरीब बच्चों की संख्याह दोगुनी हो गई है, कुपोषण इसकी मुख्ये वजह है।

रिपोर्ट को जारी करते हुए यूनिसेफ की यूपी प्रमुख नीलोफर पौरजाड ने अपील की कि उन बच्चों के लिए निवेश करने की आवश्यकता है जो किन्हीं कारणवश पीछे रह गए हैं। वैश्विक स्तर पर सरकारों को अपनी नीतियों में इस प्रकार बदलाव कर अधिक अवसर प्रदान करने की आवश्यकता है।

पौरजाड ने बताया कि‍ सर्व शिक्षा अभियान के माध्यम से स्कूल जाने वाले बच्चों की संख्याे बढ़ी है और शिक्षा के अधिकार को कानूनन लागू किया गया है। इसका असर प्राथमिक शिक्षा के लिए होने वाले नामांकनों पर दिखने लगा है,जिसका आंकड़ा लगभग 100 प्रतिशत के करीब पहुंच चुका है। इसके अलावा स्कूल नहीं जाने वाले बच्चों की संख्या  में भी लगातार गिरावट हुई है।

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