विकास की बड़ी लकीर खीचना चाहते हैं अखिलेश

लखनऊ। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव सूबे में अगले कुछ माह में होने वाले विधानसभा चुनाव को विकास के मुद्दे पर ही लडना चाहते है। इसीलिए वह विकास की बडी लकीर खीचना चाहते है। इसका असर अब राजधानी लखनऊ में अब दिखने लगा है।

अब तक बसपा सुप्रीमो मायावती द्वारा राजधानी में बनाये गए पार्को एवं स्मारकों का लोग बखान करते थे। लेकिन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव अब इन्हें पीछे छोड दिया है। उन्होंने लखनऊ में 376 एकड का एक पार्क विकसित किया है।

जिसका नाम जनेष्वर मिश्रा पार्क है। इसके अलावा राजधानी में करीब सौ किमी का साइकिल ट्रैक बना दिया है। बाकी सौ किमी इस टैक को और बढाया जा रहा है।

इसके अलावा स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी उन्होंने ऐतिहासिक कार्य किये है जिसका असर अस्पतालों में दिखने लगा है। आधुनिक एवं सस्ती सेवाओं का लाभ आम मरीजों को मिल रहा है। षिक्षा की बात करे तो एकेटीयू का सपा सरकार में कायाकल्प हो गया।

इसी तरह लखनऊ की जीवन दायनी गोमती नदी को भी लंदन के टेम्स की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है। गोमती नदी का रिवरफ्रंट बनाकर अखिलेश सरकार यहां भी बड़ी लकीर खींचना चाहती है.।

इसे मुख्यमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट बताया जा रहा है। गोमती रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट अहमदाबाद के साबरमती रिवरफ्रंट प्रोजेक्ट को भी टक्कर देगा।
अखिलेश यादव का लंदन के टेम्स की तर्ज पर पिछले साल पहले शुरू हुए गोमती के रिवरफ्रंट का पहला चरण न सिर्फ इस साल पूरा हो जाएगा, बल्कि चुनावों के पहले उसे जनता को सौंप भी दिया जाएगा।

लखनऊ के वासियों के लिए यह सौगात चुनाव के पहले देकर इसका चुनावी लाभ लेने की कोशिश की जा रही है। गोमती रिवरफ्रंट का काम अपने आखिरी चरण में है और इसी साल दिसंबर तक पूरा हो जायेगा। यह रिवरफ्रंट 8.1 किलोमीटर का है, जिसपर करीब 3 हजार करोड़ का खर्च आएगा. अब तक सरकार करीब डेढ़ हजार करोड़ का खर्च कर भी चुकी है।

इस रिवरफ्रंट को वर्ल्ड क्लास बनाने की तैयारी है, जिसमें सैलानियों के लिए खेलकूद, सैर, साइक्लिंग, योग, नौकायन सहित कई तरह की सुविधाएं होगीं.। पहले चरण में जो रिवरफ्रंट जनता के लिए खोला जाएगा उसका लगभग 80 प्रतिशत पूरा किया जा चुका है। इसमें करीब 300 गाड़ियों के पार्किंग के लिए दो बड़े पार्किग जोन तथा सुरक्षा के लिए 250 सीसीटीवी लगाए जाएंगे.।

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