Review: कुश्ती के साथ दिल भी जीत लिया ‘सुल्तान’

मुंबई| 2016 की सबसे बड़ी फिल्मों में एक सलमान खान की फिल्म ‘सुल्तान’ आज रिलीज हो चुकी है , जो  उनके प्रशंसकों के लिए ‘ईदी’ से कम नहीं है| अनुष्का शर्मा और निर्देशक अली अब्बास जफ़र और निर्माता यशराज फिल्म्स के आदित्य चोपड़ा के साथ पहली बार इस फिल्म में सलमान ने कम किया है |

बता दे कि निर्देशक ने ही ‘सुल्तान’ के डायलॉग और स्क्रीनप्ले लिखे हैं, और सलमान-अनुष्का के अलावा रणदीप हुड्डा, अमित साद और कुमुद मिश्रा अहम भूमिकाओं में दिखे हैं| सुल्तान’ हरियाणा के पहलवान ‘सुल्तान’, यानी सलमान ख़ान की कहानी है, जो आरफ़ा, यानी अनुष्का शर्मा के प्यार में नाम कमाने की ज़िद पकड़ बैठता है और इसी ज़िद में बन बैठता है आरफ़ा से मशहूर सुल्तान की शादी होती है, जो खुद भी एक स्टेट लेवल की पहलवान हैं|

फिल्म की कहानी एवरेज है,  ‘सुल्तान’ देखने के बाद आपको ऐसा नहीं लगेगा कि आपने कोई बेहतरीन कहानी देखी है| सलमान के हीरोइज़्म को ध्यान में रखकर बुने जाने के कारण स्क्रीनप्ले लंबा लगता है,  फिल्म में सलमान का क़िरदार जमाने में ज़्यादा वक्त निकल जाता है, जिसकी वजह से फिल्म का पहला भाग ज़रा ढीला लगता है|

लेकिन जो सलमान खान के फ़ैन हैं, उन्हें शायद ऐसा न लगे… वैसे, फिल्म में सलमान की डायलॉग डिलीवरी का सुर भी ज़रा दबा हुआ और ठंडा लगा है|

खूबियों की बात करें तो सलमान के फ़ैन्स के लिए सबसे पहली खूबी हैं खुद सलमान खान, जो दर्शकों को फिल्म से बांधे रखते हैं| अपनी एक्टिंग से नहीं, अपने व्यक्तित्व से|

कुछ सीन्स आपको मुस्कुराने पर मजबूर करेंगे तो कई जगह शायद आप अपने आंसू न रोक पाएं… आपके जज़्बात को फिल्म झकझोर सकती है… ‘सुल्तान’ जहां देश की मिट्टी के खेल पहलवानी की बात करती है, वहीं ‘बेटी बचाओ’ मुहिम से जुड़ा मज़बूत संदेश भी देती है…

फिल्म के कुछ डायलॉग भी मुझे पसंद आए , संगीत की बात करें तो विशाल-शेखर का संगीत अच्छा है और दोनों ही आपको चौंकाएंगे उन गानों में, जिनमें हरियाणा की मिट्टी की ख़ुशबू झलकती है|

फिल्म के सभी गाने सुरीले हैं और उनके बोल अच्छे हैं फिर चाहे वो ‘जग घुमया’ हो या टाइटल ट्रैक ‘सुल्तान’… फिल्म के कई फ़ाइट सीन मुझे अच्छे लगे, जहां दर्शक भी सलमान के साथ फ़ाइट का हिस्सा बने दिखते हैं|

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