फिल्म मेकर्स को धार्मिक भावनाओं के प्रति संवेदनशील होना चाहिए

मुंबई। ‘उड़ता पंजाब’ को लेकर चर्चा में रहे सेंसर बोर्ड के प्रमुख पहलाज निहलानी ने फिल्म ‘ढिशूम’ से संबंधित विवाद पर अपने विचार रखे हैं। उन्होंने कहा है कि फिल्मकारों को लोगों की धार्मिक भावनाओं के प्रति संवेदनशील होना चाहिए। सिख समुदाय ने गीत ‘सौ तरह की’ में जैकलिन के छोटे कपड़ों के साथ कृपाण जैसे छोटे खंजर के प्रयोग को लेकर आपत्ति दर्ज की है।

दिल्ली सिख गुरुद्वारा समिति द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार जैकलिन के कृत्य से ‘कृपाण की पवित्रता और सम्मान का मजाक बना है।’ ‘ढिशूम’ के निर्माता साजिद नाडियाडवाला और प्रमुख अभिनेता वरुण धवन इस बारे में पहले ही स्पष्टीकरण दे चुके हैं कि गीत में कृपाण का नहीं, बल्कि अरबी तलवार का प्रयोग किया गया है।

निहलानी ने जैकलिन पर फिल्माए गीत पर तीव्र प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि क्या भारत के अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नए दिग्गजों के पास इसका कोई उपाय है, जो यह मानते हैं कि फिल्मकारों को कुछ भी दिखाने और कहने की इजाजत होनी चाहिए?” जिनकी धार्मिक भावनाएं आहत होती हैं, वे हमसे कहीं ज्यादा सतर्क होते हैं ।

आपको बता दे कि निहलानी ने यह भी कहा कि भारत में धार्मिक भावनाएं बेहद संवेदनशील हैं। वे आसानी से आहत हो सकती हैं और बड़े पैमाने पर लोगों को गंभीर शारीरिक नुकसान पहुंचा सकती हैं।

उन्होंने धार्मिक सामग्री से युक्त फिल्मों को सेंसर करने के लिए धार्मिक विद्वानों और विशेषज्ञों की मौजूदगी की भी सिफारिश की। उन्होंने कहा, “लेकिन, तब क्या किया जाए जब गीत और नृत्य सांस्कृतिक और धार्मिक नियमों का उल्लंघन करते हों? फिल्मकारों को निश्चित तौर पर संवेदनशील होना चाहिए।”

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