कांग्रेस में खोया जनाधार हासिल करने की छटपटाहट

मुस्लिम- ब्राम्हण गठजोड पर फोकस
सर्वमान्य ब्राम्हण नेता पर सर्च जारी
लखनऊ। तकरीबन तीन दशक से यूपी में सियासी वनबास झेल रही कांग्रेस में खोया जनाधार हासिल करने के लिए गजब की छटपटाहट है। काग्रेस एक बार फिर अपने पुराने वोट बैंक को मजबूत करना चाहती है। वह ब्राम्हण- मुस्लिम और दलित गठजोड को धार देना चाह रही है।

इसीलिए पार्टी ने यूपी का प्रभार एक बडे मुस्लिम नेता को सौंप दिया है। अब एक अदद ब्राम्हण चेहरे की तलाष जारी है। इसमें दिल्ली की पूर्व सीएम षीला दीक्षित, सांसद प्रमोद तिवारी एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री जितिन प्रसाद का नाम आगे चल रहा हैं।

आजादी के बाद से 1988 तक कांग्रेस ने यूपी में ही नहीं बल्कि पूरे देष में अखण्ड राज किया। इस राज की असली वजह मुस्लिम, ब्राम्हण एवं दलित वर्ग कांग्रेस के साथ जुडा था।

लेकिन राम मंदिर आंदोलन के दौरान कांग्रेस का यह वोट बैंक बिखर गया जिससे पार्टी हासिये पर आ गयी। अब इसी गठजोड को एक बार फिर धार देने का काम किया जा रहा है।

जातीय समीकरण को दुरूस्त करने पर इन दिनों चुनाव प्रबंधन का काम देख प्रषांत किषोर पूरा जोर दे रहे है। प्रदेश में करीब 19 प्रतिशत मुस्लिम है। जो लगभग दो दशक से सपा एवं बसपा का बारी बारी से समर्थन करते आ रहे है।

अब इन्हें आकर्षित करने के लिए कांग्रेस ने जम्मू काष्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री गुलाम नबी आजाद को यूपी का प्रभार सौंपा है। आजाद के आने से कांग्रेस के पक्ष में मुस्लिम मतों का कुछ झुकाव होना तय है।

इसका लाभ पार्टी को वेस्ट यूपी में मिलने की उम्मीद है। इसी तरह कांग्रेस एक बार फिर ब्राम्हणों को अपने साथ जोडना चाहती हैं। क्योंकि प्रदेष में इनकी आबादी करीब 13 प्रतिषत है और पूर्वाचंल में खासा प्रभाव भी।

इस वर्ग को अपने साथ जोडने के लिए कांग्रेस एक अदद सर्वमान्य ब्राम्हण चेहरे की तलाष कर रही है। जिसे पार्टी सीएमकडीडेट घोषित करने पर विचार कर रही है। इसमें दिल्ली की पूर्व सीएम षीला दीक्षित, सांसद प्रमोद तिवारी एवं जितिन प्रसाद के नाम पर मंथन चल रहा है।

यह तीनों ही नेता बेदाग और सर्वमान्य भी है। यहां पर सपा एवं बसपा मुखिया से टक्क्र दे सकते है। कांग्रेस की निगाहें दलितों पर भी है। इन्हें रिझाने के लिए पार्टी भीम ज्याति यात्रा निकाल चुकी है। इस वर्ग के भी एक नेता ही तलाश है।

इस तरह यदि कांग्रेस इन तीनों वर्गो को साथ जोडने में कामयाब हो जाती है तो निष्चित ही उसकी ताकत बढेगी। इस बाबत पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एव विधायक डा रीता बहुगुणा जोशी ने बताया कि इस बार आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर एक चेहरा घोषित करने पर विचार चल रहा है। रही बात नाम की तो पार्टी में नेताओं की कमी नहीं है।

नेता का चयन करने का काम पार्टी हाईकमान का है हम तो बस कांग्रेस के एक सिपाही है। जो जिम्मेदारी दी जायेगी उसका पालन करूंगी।

नौतियां कम नहीं

खोयी ताकत हासिल करने के लिए कांग्रेस के पास चुनौतियां का अंबार है। सबसे पहले संगठन को बूथ स्तर मजबूत करना होगा। अभी ग्रामीण क्षेत्र में बहुत से बूथ है जहां एक भी कांग्रेसी नहीं है। इसके अलावा पार्टी में चल रही गुटबाजी को भी समाप्त करना होगा। टिकट वितरण में भी परिवारवाद पर विराम लगाकर प्रभावशाली नेताओं को मौका देना होगा।

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