प्रीति की प्रीत से दिग्गज हैरान

सपा बसपा के 50 से अधिक विधायकों की भूमिका संदिग्ध
भाजपा दे रही आफर, रालोद विधायकों में भी फूट

लखनऊ। भाजपा के समर्थन से राज्यसभा जाने की जुगत में प्रीति महापात्रा ने महज दस दिनों में यूपी की राजनीति में धमाल मचा दिया। आज हर राजनीति से जुडे व्यक्ति की जुवान पर प्रीती का नाम है। इतना ही नहीं सपा प्रमुख मुलायम सिह यादव जैसे सियासी पहलवान भी हैरत में है। राजनीति में तेज तर्रार छवि के रूप में प्रसिद्ध मायावती को भी अपने विधायकों को एकजुट करने में पसीने छूट रहे है।

गुजरात से यूपी में आकर प्रीति ने यहां ऐसा जाल बिछाया कि सपा बसपा जैसे दलों की नींद उड गयी है। सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव को अपने विधायकों को सहेजने के लिए रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजाभैया के घर तक की दौड़ लगानी पड़ रही है। इतना ही नहीं सपा ने विधायकों की निगरानी के लिए आठ सेक्टर प्रभारी बनाये है। चुनाव के दौरान विधायकों का भोज भी आयोजित किया जा रहा है।

चर्चा है कि सपा के बागी 30 विधायक प्रीति के सम्पर्क में है। इनमें से अधिकांष विधायकों का भाजपा ने टिकट भी देने का वादा किया है। इसे साथ ही बागी विधायकों को मंह मांगे पैसे भी देने की चर्चा है। चर्चा यह भी है कि समाजवादी पार्टी में डिनर पार्टी में कई विधायक नहीं आए। इससे नेताजी सहित अन्य बड़े नेताओं की नींद उड़ी हुई है।

बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती तेज तर्रार नेता मानी जाती हैं लेकिन वह भी प्रीति महापात्रा की चमक से हैरान है। उन्होनंे आज पार्टी मुख्यालय पर विधायकों के साथ बैठक की। इसमें भी कई विधायक नहीं आए। उन्हें भी डर सता रहा कि कहीं उनके विधायक भी प्रीति की पाले में न चले जाएं। चर्चा यह भी बसपा से करीब दस विधायक प्रीति के सम्पर्क में है।

ऐसे में बसपा का तीसरा प्रत्याषी विधान परिषद के लिए रूक सकता हैं। यदि प्रीति कांग्रेस के गढ़ में सेंध लगाती हैं तो कांग्रेस उम्मीदवार कपिल सिब्बल को सबसे ज्यादा नुकसान होगा। क्योंकि उन्हें अपनी पार्टी के अलावा भी कुछ वोटों का इंतजाम करना है।

रालोद के आठ विधायक है पार्टी सुप्रीमो अजित सिंह ने इन विधायकों के साथ बैठक कर उन्हें सपा के पक्ष में मतदान करने के संकेत दिए हैं। लेकिन रालोद के विधायक एकजुट नहीं है। चर्चा यह भी है कि कुछ कांग्रेस तो कुछ भाजपा के साथ है।
बहरहाल इस चुनाव को लेकर सभी पार्टियों की नींद उड़ी है। इसे लेकर सभी दल अपने विधायकों को संभालने में जुटे हैं कि कहीं ये क्रॉस वोटिंग न कर बैठें।

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