दलित परिवार को जिन्दा जलाने के मामले में 3 गिरफ्तार, 7 पुलिसवाले सस्पेंड

फरीदाबाद| फरीदाबाद के बल्लभगढ़ स्थित सुनपेड गाँव में एक दलित परिवार को ज़िंदा जलाने के मामले में पुलिस ने तीन लोगों को गिरफ़्तार किया है। साथ ही लापरवाही बरतने के आरोप में सात पुलिसवालों को सस्पेंड कर दिया गया है। दलित परिवार की सुरक्षा में सात पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था।

इस घटना में मारे गए जितेंद्र के दोनों बच्‍चों दो साल के वैभव और 1 साल की दिव्या का आज सफदरजंग अस्पताल में पोस्टमॉर्टम किया जाएगा। दोनों के शव दोपहर तक सुनपेड गांव में पहुचेंगे। एक सवर्ण परिवार पर इन लोगों को जलाकर मारने का आरोप है।

जानकारी के मुताबिक़ पुलिस कमिश्‍नर ने जितेंद्र को उचित सुरक्षा देने का लिखित वादा किया था। इसके बावजूद यह घटना हुई। पिछले साल गांव में मोबाइल को लेकर हुए झगड़े के बाद सवर्ण जाति के तीन लोगों की हत्‍या कर दी गई थी। तब दलित परिवार पर हत्‍या का आरोप लगा था।

दलितों को डर था कि दबंग पूरी जाति से इसका बदला लेंगे। लिहाजा, कई दलित परिवार गांव छोड़कर चले गए थे, जिसमें जितेंद्र भी शामिल था। हालांकि एससी/एसटी आयोग में मामला जाने के बाद फरीदाबाद के पुलिस कमिश्‍नर ने लिखित में कहा था कि जितेंद्र के घर के पास एक पुलिस जिप्‍सी, आधा दर्जन हथियारबंद जवान और दो बाइक सवार जवान तैनात रहेंगे। इस भरोसे के बाद ही जितेंद्र और उसका परिवार इसी वर्ष जनवरी में गांव में लौटा था।

इस हमले में घायल जितेन्द्र, उसका परिवार और पूरा गांव सदमे में हैं। उनका आरोप है कि मंगलवार की अल सुबह करीब 3 बजे उसके घर में कई सवर्ण जाति के लोग दाखिल हुए और पेट्रोल डालकर उनके परिवार को जिन्दा जला दिया। इस घटना में जितेन्द्र का दो साल का बेटा वैभव और करीब एक साल की बेटी दिव्या की मौत हो गई, जबकि पत्नी रेखा और वह खुद घायल है।

हरियाणा के मुख्यमंत्री ने पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये मुआवजा देने का ऐलान किया है और आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया है। घटना के बाद पुलिस ने गांव को छावनी में तब्दील कर दिया। घटना की जगह पर फोरेंसिक एक्सपर्ट ने जांच की। हालांकि पुलिस को ऐसा कोई चश्मदीद नहीं मिला, जिसने आरोपियों को देखा हो।

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