प्रीति, दयाशंकर की राह आसान नहीं

लखनऊ। राज्यसभा की 11 एवं विधानपरिषद की 13 सीटों के लिए हो रहे चुनाव से इन दिनों सियासत गर्म है। इस चुनाव में भाजपा ने अपने विधायकों की संख्या से कहीं अधिक प्रत्याशियों को मैदान में उतार दिया है। जिसके कारण चुनाव में क्रास वोटंग का खतरा बढने के साथ ही विधायकों की खरीद फारोख्त तेज हो गयी है।

राज्यसभा के चुनाव में सपा ने सात, बसपा ने दो, कांग्रेस ने एक भाजपा ने दो प्रत्याशियों को उतार कर सभी दलों का समीकरण बिगाड दिया। भाजपा के विधायकों की संख्या 41 है।

इसके साथ ही एनसीपी से फतेहबहादुर सिंह, अपनादल के आर के वर्मा, निर्दलीय सुशील सिंह तथा सपा के बागी राम पाल यादव के भाजपा के साथ होने की सम्भावना है।

इस तरह भाजपा के पास कुल 46 विधायकों का ही समर्थन मिल पा रहा है। राज्यसभा के लिए एक प्रत्याशी को 34 मतों की आवश्याकता होती है। ऐसे में शिव प्रताप शुक्ला की जीत तय है। लेकिन प्रीति महापात्रा के पास सिर्फ 12 वोट ही बच रहे है। इन्हें 22 मतों का जुगाड करना होगा जो आसान नहीं है।

इसी तरह विधान परिषद के लिए भी भाजपा ने भूपेन्द्र चौधरी एवं दयाशंकर सिंह को उतारा है। चौधरी की जीत तो तय है लेकिन दयाशंकर को करीब दर्जन भर मतों का जुटाना होगा, जो असान नहीं है। भाजपा के अतिरिक्त प्रत्याशी उतारने से कांग्रेस के कपिल सिब्ब्ल की राह थोडी कठिन होती दिख रही है।

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