प्रीति ने बढ़ाई सपा-कांग्रेस की धड़कने

लखनऊ। भारतीय जनता पार्टी तथा कुछ छोटे दलों के समर्थन से राज्यसभा का नामांकन कर गुजराती पूंजीपति की पत्नी प्रीति महापात्रा ने समाजवादी पार्टी तथा कांग्रेस की धडकनें तेज कर दी है। महापात्रा के नामांकन की विधानसभा के गलियारे में मंगलवार को तीन बजे तक हाई बोल्टेज ढ्रामा चलता रहा। इसका प्रभाव यह रहा कि महापात्रा का नामांकन देखने के लिए सपा एवं कांग्रेस के कई प्रमुख नेता सेंट्रलहाल में घंटो तक जमे रहे।

वैसे तो महापात्रा ने निर्दल प्रत्याशी के रूप में राज्यसभा के लिए नामांकन किया परंतु इसके पीछे भाजपा की सुनियोजित रणनीति काम कर रही थी। महापात्रा आज सुबह की प्रदेश भाजपा कार्यालय पहुंच गयी थी। उनके भी नामांकन प्रक्रिया भाजपा के अधिकृत प्रत्याषियों के साथ पूरी की गयी।

महापात्रा के नामांकन का क्रेज छोटे दलों में इतना था कि पीस पार्टी के नेता डा अयूब, प्रीती के पहुंचने से पहले ही सेंटल हाल में पहुंच गए। उन्होंने मीडिया के समक्ष कहा कि छोटे दल मिलकर राज्यसभा के लिए महापात्रा को निर्दल प्रत्याषी के रूप में खडा कर रहे है। महापात्रा के प्रस्तावकों में भाजपा के पांच,पीस पार्टी के एक, एनसीपी के फतेह बहादुर सिंह, सपा के बागी राम पाल यादव, बसपा के बागी बाला प्रसाद अवस्थी प्रमुख रूप रहे।

महापात्रा ने दो सेटों में नामांकन किया जिसमें अयूब के स्थान पर एक दूसरे सदस्य ने प्रस्ताव किया।महापात्रा के नामांकन से साफ हो गया है कि सपा बसपा के बागी कई विधायक इनके पक्ष में आ सकते है। सपा के बागी विधायक राम पाल यादव ने दावा किया कि उनके साथ दस विधायक महापात्रा को वोट देंगे।

इसी प्रकार रालोद के दो विधायक भी आज काफी देर तक महापात्रा के साथ देखे गए। महापात्रा के मैदान में आने के बाद विधायकों की खरीद फरोख्त की चर्चाएं तेज हो गयी है। इसका सर्वाधिक असर सत्तारूढ समाजवादी ,खेमे में होने की आंषका जतायी जा रही है। सपा में यदि भगदड मची तो सातवे प्रत्याशी के रूप में खतरा पैदा हो सकता है। इसके साथ ही कांग्रेस के कपिल सिब्बल के लिए भी राह आसान नहीं होगी।

राज्यसभा के लिए न्यूनतम 34 प्रथम वरीयता के मतों की आवष्यकता होती है। कांग्रेस को भी पांच विधायकों का समर्थन हासिल करना होगा। जबकि सपा को अपने सभी सातों प्रत्याशी जिताने के लिए दस अतिरिक्त मतों की आवष्यकता होगी। इसमें से एक विधायक पहले से ही बगावत कर चुके है। महापात्रा के मैदान में आने से रालोद एवं अन्य छोटे दलों एवं निर्दल विधायकों की मांग बढ गयी है।

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