अजित की सपा से नहीं बनी बात

विधायक असमंजश में 

लखनऊ। हर चुनाव में दोस्त बदल कर सत्तासुख भोगने के आदी रालोद मुखिया चौधरी अजित सिंह को नया साथी नहीं मिल पा रहा है। बीते कई दिनों से सपा के साथ चल रही उनकी दोस्ती की बात आज टूट गयी है।

ऐसे में उनका इस बार भी राज्यसभा पहुंचना कठिन हो गया है। इसके अलावा राज्यसभा की 11 सीटों एवं विधान परिशद की 13 की सीटों के लिए हो रहे चुनाव में रालोद विधायक किसे वोट देंगे यह भी अभी तय नहीं हो पाया है।

चौधरी अजित सिंह राज्यसभा पहुंचने के लिए बीते कई दिनों से सपा के साथ दोस्ती करने का प्रयास कर रहे थे। इसे लेकर निवार को उनकी सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव से वार्ता हुई।

आज इस वार्ता को अंजाम तक पहुंचाने के लिए सपा नेता शिवपाल सिंह यादव रालोद मुखिया चौधरी अजित सिंह के दिल्ली स्थित आवास पर पहुंचे। इन दोनों नेताओं के बीच करीब एक घंटे तक विस्तार से वार्ता हुई। लेकिन यह वार्ता बेनतीजा रही।

इससे पूर्व रालोद मुखिया से भाजपा के साथ गठबंधन करने की पहल की थी। कई चरणों में वार्ता भी हुई। आगामी चुनाव को लेकर सीटों का बटवारा भी लगभग तय हो गया था।

लेकिन पार्टी नेताओं के विरोध को देख भाजपा ने इस दोस्ती को करने से इनकार कर दिया। इसी तरह रालोद ने बसपा के साथ भी दोस्ती करने का प्रयास किया लेकिन बात नहीं बनी।

पूर्व में बिहार के सीएम निती कुमार की अगुवाई में बने गठबंधन के साथ ताल मेल करने की बात नहीं बन पायी। इस तरह रालोद की स्थित 2007 वाली बनती जा रही है। इस चुनाव में रालोद अकेले ही चुनाव लडा था। इससे पूर्व रालोद ने भाजपा एवं सपा के साथ गठबंधन कर सत्ता सुख उठा चुका है।

 

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