किसानों के जले पर नमक लगाते विकास पर्व

यूपी में 45 केन्द्रीय मंत्री मना रहे जशन
एक हजार करोड का विज्ञापन
उधोगपतियों को 1,72,000 करोड की राहत
उमेश कुमार
लखनऊ। मोदी सरकार दो साल के कार्यकाल पूरा होने पर विकास पर्व के रूप में जशन मना रही है। इसमें अरबों रूपये पानी की तरह बहाया जा रहा है। लेकिन सूखे से कराह रहे किसान अपनी फसल की बर्बादी को देख आत्म हत्या करने को विवश है। जबकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी सरकार को गरीबो की सरकार बता रहे है।
केन्द्र सरकार के दो साल के जष्न का पूरा फोकस यूपी पर है। क्योंकि यहां पर कुछ ही माह में चुनाव होना है। इसीलिए मोदी ने अपनी सभा का स्थान सहारनपुर चुना। इस दौरान उन्होंने अपने दो साल की उपलब्धियों को गिनाके चुनावी बिगुल फूंक दिया। अगले दिन केन्द्र सरकार के कई मंत्रियों ने यूपी के कई जिलों में आयोजित कार्यक्रमों में भाग लेकर केन्द्र की उपलब्धियां गिनाई।

केन्द्र सरकार के 45 मंत्रियों का कार्यक्रम यूपी में तय हो चुका है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह स्वयं 31 मई को इलाहाबाद मे सभा करने आ रहे है। इसके अलावा भाजपा ने इलाहाबाद में ही 12 एवं 13 राष्ट्रीय कार्यसमिति की बैठक तय की है। इसमें भी पार्टी के अधिकांश बडे नेताओं के आने का कार्यक्रम है।
केन्द्र सरकार विकास पर्व पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों के प्रचार के लिए एक हजार करोड का बजट तय किया है। जबकि इन कार्यक्रमों के आयोजन में पानी की तरह पैसा बहाया जा रहा है।
वहीं प्रदेश में किसानों की हालत पतली है। उन्हें बिजली संकट के साथ ही पानी की भी दिक्कत है। जिससे फसले सूख रही है। बुंदेलखण्ड में तो पीने के पानी के लाले है। गन्ना किसानों का करीब छह हजार करोड रूपये बकाया है।

बीते दो साल से सूखे एवं ओलावृष्टि से बर्बाद हुई फसलों का मुआवजा केन्द्र एवं प्रदेश सरकार के बीच अटका है। किसान बैंक के कर्ज से भी परेशान है बैंक उनकी जमीनेां को नीलामी की नेाटिस दे रहे है। इससे वह आत्म हत्या करने को विवश है। वही केन्द्र सरकार किसानों को राहत देने के बजाय उघोगपतियों को एक लाख 72 हजार करोड की राहत दे चुकी है।

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