दुविधा में छोटे चौधरी, नहीं गल रही दाल

भाजपा के दोस्ती टूटने के बाद अब सपा
कांग्रेस एवं जदयू के सम्पर्क में पार्टी नेता अपने मन माफिक सीटों पर करने लगे प्रचार

लखनऊ। हर चुनाव में दोस्त बदलकर सत्ता का सुख भोगने के आदी राष्ट्रीय लोकदल के मुखिया चौधरी अजित सिंह इन दिनों दुविधा में है। भाजपा से गठबंधन की बात बिगडने के बाद अब वह सपा, कांग्रेस एवं जनता दल यू के सम्पर्क में है।

वहीं बिना गठबंधन के ही पार्टी के कुछ नेता अपने अपने क्षेत्रों में प्रचार कर अपनी जमीन तैयार कर रहे है। छोटे चौधरी भाजपा के साथ आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर तालमेल करना चाहते थे। उनकी बात भी लगभग तय हो गयी थी।

लेकिन भाजपा नेताओं के विरोध के कारण उनकी बात नहीं बनी। भाजपा से दोस्ती टूटने के बाद रालोद मुखिया कई दलों के सम्पर्क में है। इन दिनों सपा में पुराने लोगों की वापसी हो रही है।

वह सपा के साथ सत्ता का सुख भोग चुके है। लेकिन उनकी बात नहीं बनी। सपा ने उन्हें पार्टी में विलय करने का प्रस्ताव रखा। पार्टी नेताओं के अनुसार छोटे चौधरी की मुलाकात कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से कई बार हो चुकी है।

क्योंकि वह 2012 के विधानसभा चुनाव एवं 2014 का लोकसभा चुनाव कांग्रेस के साथ लड चुके है। यूपीए सरकार में मंत्री भी रह चुके है। लेकिन यहां पर सीटों का बटवारे को लेकर कई पेंच आ रहे है।

बिहार मे सफलता के बाद कांग्रेस यहां पर रालोद को ज्यादा तरजीह नहीं दे रही है। इसके साथ छोटे चौधरी की बात महागठबंधन में भी जारी है। इसके लिए वह जदयू नेता शरद यादव से भी कई बार मिल चुके है।

पार्टी में अजीब स्थित है कि एक ओर छोटे चौधरी गठबंधन का प्रयास कर रहे है। वहीं दूसरी ओर पार्टी के कुछ नेता अपने मन माफिक सीटों पर प्रचार कर अपनी जमीन तैयार कर रहे है।

रालोद प्रदेश अध्यक्ष मुन्ना सिंह चौहान बीकापुर, युवा रालोद के रविन्द्र पटेल चुनार, राम नगर से शिवकरन सिंह राठोर, हाटा से अंशुमान सिंह सहित कई नेता चुनाव मैदान में उतर गये है।

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