बिजली संकट को लेकर हाहाकार

मांग व आपूर्ति में 1600 मेगावाट का अंतर
1500 मेेगावाट उत्पादन बढ़ाने का दावा

लखनऊ। इन दिनों पूरा प्रदेश भीषण गर्मी की चपेट में है। लेकिन बिजली सभी को रूला रही है,। चाहे वह शहरी क्षेत्र हो या फिर ग्रामीण। ग्रामीण क्षेत्रों की हालत बेहद खराब है । वहीं बिजली विभाग कुछ बिजली उत्पादन बढ़ाने पर जोर आजमाइश कर रहा है। लेकिन बिजली चोरी एवं लाइन लास पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

जिसके कारण इस भीषण गर्मी में बिजली का जबरदस्त संकट बरकरार है। बिजली विभाग के अनुसार इस चिपचिपाती गर्मी में इन दिनों 13804 मेगावाट बिजली की प्रदेश को आवश्यकता है। लेकिन इन दिनों बमुश्किल से 12360 मेगावाट बिजली ही आपूर्ति की जा रही है। इसके अलावा विभाग का दावा है कि हम ग्रामीण क्षेत्र में 16 घटे विजली की आपूर्ति कर रहे हैं।

लेकिन शायद कोई ऐसा गांव होगा जहां पर अनवरत 16 घंटे बिजली आती होगी। औसतन ग्रामीण क्षेत्रों में आठ से दस घंटे ही विद्युत आपूर्ति हो पा रही है। इसी तरह तहसीलों में 20, जनपदों में 22 तथा महानगरों एवं उद्योगों को 24 घंटे विधुत आपूर्ति का दावा किया जा रहा है। इसके अलावा सपा सरकार ने सूखे की मार से तडफ रहे बुदेंलखण्ड को 24 घंटे बिजली देने का आदेश दिया है।

लेकिन इस क्षेत्र में भी 16 से 20 घंटे बिजली मिलने की सूचनाएं आ रही है। बिजली विभाग यह भी दावा कर रहा है कि प्रदेश सरकार के अथक प्रयास से चार साल में प्रदेश में करीब 1500 मेगावाट विधुत उत्पादन बढ़ाया गया। लेकिन इस अतिरिक्त बिजली की आपूर्ति कहां की जा रही है। पहले की तुलना में बिजली व्यवस्था में सुधार के भी दावे किये जा रहे हैं।

विभाग के मुताबिक इन दिनों प्रदेश मे 10 से 30 प्रतिशत तक लाइन लास है। जिसके लिए जर्जर बिजली के तार एवं थके ट्रासंफार्मर है। इस दिशा में कोई कारगर कदम नहीं उठाये जा रहे हैं। इसके अलावा विभाग के भ्रष्टाचार का खेल जोरों पर है जिसके जरिये बिल को कम करने के साथ ही मीटर से छेड़छाड़ किया जाता है। कर्मचारियों के इस कृत्य से अधिकारी भी आजिज है।

200 रु में भरपूर बिजली
शहर की मलिन बस्तियों एवं रेलवे लाइन के किनारे बसी झोपडियों पर बिजली विभाग के कर्मचारी मेहरबान है। यह कर्मचारी इन लोगों को मात्र 200 रुपये में भरपूर बिजली उपलब्ध करा रहे हैं। इन झोपडियों में रहने वाले लोगों के घरों में हीटर से खाना बनाने, टीवी, फ्रिज चलाने तक ही सुविधा दी जा रही है।

जिसका औसतन खर्च करीब 1500 रुपये होता है। लेकिन इन्हें यह सुविधा मात्र 200 रुपये में मिल रही है। हर माह की सात से दस तरीख के बीच बिजली विभाग के कर्मचारी आकर दो सौ रूपये वसूलते है। इतना ही नहीं बिजली विभाग इन लोगों के लिए कभी जांच करने भी नहीं आता।

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