कैडर कैंप के जरिये वोट बैंक सहेजने की कोशिश

300 ब्लाकों में आयोजित हो चुके है यह कैंप
गरीब सर्वर्णो को आरक्षण का लालीपॉप

लखनऊ। सूबे में अगली सरकार बनाने के लिए संघर्ष कर रही बहुजन समाज पार्टी इन दिनों कैडर कैंप आयोजित कर वोट बैंक सहेजने की कोशिश कर रही है। इन कैंपों में प्रदेश स्तरीय बड़े नेता शामिल होकर पार्टी सुप्रीमो मायावती के निर्देश से समर्थकों को अवगत कराने के साथ ही सपा सरकार पर तीखा हमला बोलते है।

भाजपा एवं कांग्रेस के बढ़ते दलित प्रेम से बसपा के समक्ष अपने पर परागत वोट बैंक सहेजने की बड़ी चुनौती है। जिसके लिए हर स्तर पर पार्टी गुप चुप तरीके से काम कर रही है। पार्टी मुखिया मायावती के निर्देश पर इन दिनों विकास खण्ड स्तर पर कैडर कैंप का आयोजन किया जा रहा है।

जिसमें पार्टी द्वारा घोषित विधान सभा क्षेत्र प्रभारी, जिलाध्यक्ष, जिला एवं मण्डल कोर्डीनेटर के साथ प्रदेश स्तर का नेता भी शामिल हो रहे है। इन बैठकों में आने वाले लोगों की समस्याएं सुनने के साथ ही पार्टी के दिशा निर्देश से उन्हें अवगत कराया जाता है। इसमें यूं तो पार्टी के सभी समर्थकों को बुलाया जाता है।

लेकिन इसमें शामिल होने वालों में मु य रूप से दलित जाति के ही लोग होते हैं। इन बैठकों में संगठन की समीक्षा की जाती है। जिसमें बूथ स्तरीय कमेटियों के सत्यापन का भी काम होता है।

इन कैंपों में पार्टी नेता सपा सरकार की आलोचनाओं का बखूबी बयां करते नहीं अघाते। जिसमें प्रदेश की कानून व्यवस्था, किसानों की माली हालत, गन्ना किसानों के बकाये भुगतान के लिए सपा सरकार को जि मेदार ठहराया जा रहा है। इसके अलावा बसपा सरकार की उपलब्धिया भी जमकर गिनाई जा रही है।

इन बैठकों में शामिल होने वाले हर समर्थक का नाम व पता लिखा जा रहा है। जिसके आधार पर उन्हें सोशल मीडिया के जरिये पार्टी के संदेशों को देने का काम भी आरंभ हो गया है। साथ ही सर्वणों को जोडने के लिए उन्हें आर्थिक आधार पर आरक्षण देने का भी वादा किया जा रहा है। पार्टी सूत्रों के अनुसार करीब 250 विकास खण्डों में यह बैठकें आयोजित की जा चुकी हैं। इसकी रिर्पोट भी मायावती को भेजी जा रही है।

प्रत्याशियों को खौफ
बसपा ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर अधिकांश सीटों पर अपने प्रत्याशी घोषित कर दिये हैं। लेकिन टिकट मिलने के बाद उनमें खौफ बरकरार है क्योंकि हर तीसरे माह पार्टी मुखिया मायावती निजी एजेंसियों के माध्यम से इन प्रत्याश्यिों की हैसियत का सर्वे कराती रहती है। जिसमें प्रत्याशी का फीडबैक तैयार उसकी रिपोर्ट मायावती को भेजी जा रही है।

इस तरह प्रत्याशियों की क्षेत्र में पकड़ का आकलन किया जा रहा है। कमजोर होने की दशा में उनका टिकट काटकर दूसरे नेता को प्रत्याशी बनाया जा सकता है। करीब दर्जन भी से अधिक प्रत्याशियों के टिकट बदले जा चुके हैं।

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