कैसंर: बचाव नहीं, इलाज पर जोर दे रही सरकार

 

राजेश सिंह

लखनऊ। प्रदेश सरकार निःसंदेह स्वास्थ्य के क्षेत्र में बेहतर कार्य कर रही है। चार साल में सरकार ने 11 मेडिकल कालेज खोलने के साथ ही एमबीबीएस की करीब एक हजार सीटें बढाने का काम किया।  मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आज केजीएमयू में पीडियाटिक कैंसर के दो वार्डों का लोकर्पण किया। लेकिन कैंसर जैसी घातक बीमारी न हो इस पर ध्यान देने के बजाए उपचार पर जोर दिया जा रहा है।

कैंसर का मुख्य कारण तम्बाकू,षराब एवं सगिरेट है। इस पर रोक लगाने के बजाय सरकार इसे बढाने पर जोर दे रही है। बिहार जैसे पिछडे राज्य मे शराब बंद कर दी गयी। लेकिन यूपी में अंग्रेजी  दारू सस्ती कर दी गयी।  इससे दारू की बिक्री करीब डेढ गुना तक बढ गयी। इसी तरह तम्बाकू युक्त पदार्थो को बनाने के लिए धडल्ले से लाइसंेस दिये जा रहे है। एक सिगरेट बेचने पर रोक के

बावजूद दुकान दार अपने लाभ के लिए धडल्ले से बेच रहे हैं। लेकिन सरकार कैंसर के उपचार पर जोर दे रही है। चक गंजरिया में उच्च स्तरीय कैंसर संस्थान का निर्माण कराया जा रहा है।  केजीएमयू में वार्डो को बढाया जा रहा है। वहीं लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में कैंसर ने विभाग बना दिये गए है। इसके साथ ही मेरडिकल कालेजों में डाक्टरों के आधे से ज्यादा पद रिक्त हैं।

संविदा पर डाक्टरों को रखकर किसी तरह से काम चलाया जा रहा है। इसी तरह सरकार ने अस्पतालों में एक्स रे, खून जांच एवं अल्टसाउंड भी निःषुल्क कर दिया लेकिन इनकी मषीनों को चलाने वाले तक नहीं है। जबकि इन जांचों के लिए मरीजों की संख्या काफी बढ गयी है।

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