फिर सुलगने लगी आरक्षण की आग

लखनऊ। कई सालों से शांत  पडी प्रमोशन में आरक्षण की आग एक बार फिर सुलगने लगी है। केन्द्र सरकार द्वारा गत दिनों संसद में इस आरक्षण के समर्थन में दिए गए वकतव्य के बाद से सरकारी कर्मचारी उग्र हो गये है और वह आंदोलन का मन बना रहे है। लेकिन विपक्षी दल वोट बैंक की लालच में खामोश  है।

ऐसे में यह आरक्षण का मामला चुनावी मुद्दा बन सकता है। मालूम हो कि गत दिनों लोकसभा में केन्द्र सरकार के एक मंत्री ने प्रमोशन
में आरक्षण का समर्थन करते हुए इस विधेयक को पारित कराने के लिए कांग्रेस का सहयोग मांगा।

बिहार चुनाव में करारी हार के बाद केन्द्र सरकार इस आरंक्षण को बहाल करना चाहती है जिससे राज्यों के होने वाले विधानसभा चुनाव में उसका लाभ मिल सके। जबकि इस आरक्षण की खिलाफत सुप्रीम कोर्ट ने स्वयं की थी।

जिसके तहत लाखों कर्मचारियों को पदावनत होना पडा। वहीं इस आरक्षण के खिलाफ सरकारी कर्मचारी लामबंद होने लगे है। आरक्षण
बचाओ संघर्ष समिति ने केन्द्र सरकार के इस वकतव्य का विरोध किया है।

इसे वापस लेने की मांग दोहराई है। इतना ही नहीं भाजपा के विरोध में गांव-गांव आंदोलन चलाने का भी ऐलान किया है। ऐसे में यह मामला
चुनावी हथियार बन सकता है। जिसमें भाजपा का नुकसान तय माना जा रहा है।

क्योंकि प्रदेश में करीब 18 लाख सरकारी कर्मचारी एवं छह लाख शिक्षक है। यदि यह भाजपा के खिलाफ लामबंद हो गए निश्चित रूप से नुकसान होगा।

पूर्ववर्ती यूपीए सरकार ने इस आरक्षण का समर्थन किया था इसके बाद सरकारी कर्मचारियों का आंदोलन भडका जिसे देख कांग्रेस ने अपने कदम पीछे खीच लिए। इसके बावजूद उसे गत लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पडा।

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