अब तक 132 बच्चों की मौत से मचा हाहाकार, बिहार में AES ने दिखाया विकराल रूप

लंबे समय तक तेज गर्मी और नमी के कारण इस वर्ष एईएस ने विकराल रूप धारण कर लिया है। इस बीमारी से पीडि़त होनेवाले बच्चों की संख्या पिछले सारे वर्षों से अधिक हो गई है। अब तक इस बीमारी से 132 बच्चों की मौत हो चुकी है जबकि जिले के अस्पतालों में 440 बच्चे भर्ती कराए गए हैं जिनका इलाज चल रहा है।

इस बीमारी से वर्ष 2014 में 342 बच्चे बीमार हुए थे। इनमें से 86 बच्चों की मौत हो गई थी। वर्ष 2012 में इस बीमारी से 120 बच्चों ने दम तोड़ दिया था। हालांकि, तब 336 बच्चे बीमार पड़े थे।

सरकार की ओर से यह कहा जा रहा कि हमने कई बच्चों को बीमारी से बचाने में सफलता हासिल की। यह संख्या सौ से अधिक है। मगर, पिछले 10 वर्षों के आंकड़े को देखें तो बीमारी से पीडि़त बच्चों की दर में कमी आई थी। वर्ष 2014 में जबकि इस बीमारी का काफी कहर था, 75 फीसद बीमार बच्चों को बचा लिया गया था।

वहीं, अगले दो वर्षों 2015 व 2016 में में करीब 85 फीसद बच्चों की जिंदगी बच गई। मगर, इस वर्ष यह आंकड़ा कम हो गया। अब तक करीब 75 फीसद बच्चों को ही हम बचा पाए। अचानक मौत की वृद्धि का यह आंकड़ा अलर्ट कर रहा। आखिर कहां चूक रह गई।

वर्ष 2014 में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने जो रणनीति बनाई उसपर अगले दो वर्षों तक अमल हुआ। जागरूकता अभियान निरंतर चलते रहे। यही कारण रहा कि बच्चे बीमार तो हुए। मगर, उनके बचने की दर अधिक रही। इन दो वर्षों के बाद बच्चों को बचा पाने की दर कम हो रही।

आंकड़ों को देखें तो जब जागरूकता का अभाव था, बीमार बच्चों के मरने की दर अधिक थी। वर्ष 2010 में सर्वाधिक 40 फीसद बीमार बच्चों की मौत हो गई थी। इस वर्ष यह आंकड़ा 25 फीसद है। यानी, करीब एक चौथाई बीमार बच्चों को हम नहीं बचा पा रहे। विभाग की ओर से चाहे जो दावे हो, कहीं न कहीं चूक तो हुई है।

पिछले कई वर्षों से एईएस पीडि़त बच्चों के आंकड़े

वर्ष    बीमार    मृत    फीसद

2010   59     24     40.67

2011  121     45     37.19

2012  336    120    35.71

2013  124     39     31.42

2014   342    86     25.14

2015    75    11     14.66

2016    30    04   13.33

2017   09     04    44.44

2018   35      11    31.42

2019  450     116   25.77

2019* 440    103    23.40

* सरकारी आंकड़ा। वहीं बीमार बच्चों में एक दर्जन बच्चे गंभीर है।

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