अक्‍टूबर में निवेशकों ने गोल्‍ड ईटीएफ से जमकर निकाले पैसे, की मुनाफावसूली….

अक्‍टूबर में निवेशकों ने गोल्‍ड ईटीएफ से जमकर पैसे निकाले। पिछले दो महीने में जहां निवेशकों ने गोल्‍ड ईटीएफ में लगभग 200 करोड़ रुपये का निवेश किया था वहीं अक्‍टूबर में 31 करोड़ रुपये निकाले। विशेषज्ञों का कहना है कि सोने की कीमतें बढ़ने की वजह से निवेशकों ने अक्‍टूबर में मुनाफावसूली की है। सितंबर में गोल्‍ड ईटीएफ में निवेशकों में 44.11 करोड़ रुपये का निवेश किया था जबकि अगस्‍त में 145.29 करोड़ रुपये का निवेश किया था। पिछले वर्ष के नवंबर के बाद ऐसा पहली बार देखा गया कि निवेशकों ने गोल्‍ड ईटीएफ में 10 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया था।

इससे पहले अक्‍टूबर 2016 में निवेशकों ने 20 करोड़ रुपये का निवेश गोल्‍ड ईटीएफ में किया था। इससे पहले मई 2013 में निवेशकों ने 5 करोड़ रुपये गोल्‍ड ईटीएफ में लगाए थे।

विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका और चीन के बीच व्‍यापार को लेकर चल रही असामान्‍य बातचीत और वैश्विक जीडीपी ग्रोथ में कमी आने की आशंकाओं को देखते हुए निवेशकों ने सोने में निवेश किया। एसोसिएशन ऑफ म्‍युचुअल फंड्स इन इंडिया (Amfi) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, पिछले महीने गोल्‍ड से संबद्ध ईटीएफ से 31.45 करोड़ रुपये की निकासी की गई।

मॉर्निंगस्‍टार इन्‍वेस्‍टमेंट एडवाइजर इंडिया के सीनियर एनालिस्‍ट मैनेजर रिसर्च, हिमांशु श्रीवास्‍तव में कहा कि हाल में गोल्‍ड ईटीएफ से निवेशकों ने जो पैसे निकाले हैं, वह और कुछ नहीं बल्कि मुनाफावसूली है। उन्‍होंने कहा कि अगर कुछ इक्‍के-दुक्‍के उदाहरणों को छोछ़ दें तो 2011 और 2012 में आई तेजी के बाद सोने की कीमतों में ज्‍यादा उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया था। लंबे समय बाद इस साल सोने में तेजी देखी गई जो हाल के समय में इसका सबसे बेहतरीन प्रदर्शन भी था।

श्रीवास्‍तव ने कहा कि इस तेजी के कारण निवेशक भी सोने की ओर आकर्षित हुए और अगस्‍त तथा सितंबर में गोल्‍ड ईटीएफ में शुद्ध रूप से निवेश हुआ। सोने की कीमतों में आई तेजी ने निवेशकों को मुनाफावसूली का अवसर भी दिया।

गोल्‍ड फंडों की प्रबंधनाधीन परिसंपत्ति अक्‍टूबर के अंत में 5,652 करोड़ रुपये थी जो सितंबर के अंत में 5,613 करोड़ रुपये थी।

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